डर्फ स्तरीय चार दिवसीय आकल्प एवं उपकरण निर्माण कार्यशाला का समापन

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चूरू। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चूरू के आईएफआईसी प्रभाग द्वारा डर्फ के अंतर्गत आयोजित चार दिवसीय आकल्प एवं उपकरण निर्माण कार्यशाला का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 17 से 20 जुलाई तक आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सर्वेक्षण, शोध, क्रियात्मक अनुसंधान एवं केस स्टडी के लिए गुणवत्तापूर्ण शोध आकल्प तथा शोध उपकरणों का निर्माण एवं उनका परिष्करण करना रहा।समापन समारोह की अध्यक्षता प्राचार्य देवकरण सिंह ने की। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य एवं पूर्व उपनिदेशक डॉ. गोविंद सिंह राठौड़ उपस्थित रहे।कार्यशाला के संयोजक एवं आईएफआईसी प्रभागाध्यक्ष डॉ. विजय लक्ष्मी शेखावत ने बताया कि चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को शोध की वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुरूप शोध आकल्प तैयार करने, शोध उपकरण विकसित करने तथा उनके प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।कार्यशाला में संदर्भ व्यक्तियों के रूप में डॉ. श्याम सुंदर कौशिक एवं जगवीर पूनिया ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने शोध आकल्प, प्रश्नावली, अनुसूची, साक्षात्कार एवं अवलोकन सहित विभिन्न शोध उपकरणों के निर्माण एवं परिष्करण की विस्तृत जानकारी दी। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने अपने शोध विषयों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शोध उपकरण तैयार किए।प्राचार्य देवकरण सिंह ने कहा कि शोध आधारित कार्य संस्कृति शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार का आधार है। उन्होंने शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं से विद्यालयों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए अनुसंधान को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।पूर्व उप निदेशक डॉ. गोविंद सिंह राठौड़ ने कहा कि क्रियात्मक अनुसंधान एवं नवाचार शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शोध की गुणवत्ता को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा शिक्षकों की शोध क्षमता का विकास करते हैं।कार्यशाला के दौरान तकनीकी व्यवस्थाओं का संचालन सुरेश डूडी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में तारा लक्ष्मी, बनवारी लाल एवं रंजू कंवर का विशेष सहयोग रहा। संचालन सचिन चौधरी ने किया।