अंधेरा, बेसहारा सांड और मौत! राजकीय कार्य से जा रहे कांस्टेबल विकास की सड़क हादसे में मौत

स्ट्रीट लाइट और बेसहारा पशुओं को लेकर नगर परिषद पर उठे सवाल!

झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
शहर की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल हवाई पट्टी सर्किल रोड पर बीती रात हुई झुंझुनूं पुलिस के कांस्टेबल विकास कुमार की मौत ने नगर परिषद की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली नजर में यह एक सड़क हादसा दिखाई देता है। लेकिन घटनास्थल की परिस्थितियां इसे महज दुर्घटना नहीं। बल्कि सिस्टम की लापरवाही से हुई मौत साबित करती हैं। गोवला निवासी 35 वर्षीय कांस्टेबल विकास कुमार पुत्र अमरसिंह राजकीय कार्य से बाइक पर जा रहे थे। एफसीआई गोदाम के पास पहुंचते ही उनकी बाइक सड़क पर घूम रहे एक बेसहारा सांड से टकरा गई। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना का सामने आया सीसीटीवी फुटेज कई सवाल खड़े करता है। फुटेज में सड़क पर घना अंधेरा दिखाई दे रहा है। जिस मुख्य मार्ग पर हर समय वाहनों की आवाजाही रहती है। वहां पर्याप्त रोशनी नहीं थी। इसी अंधेरे में सड़क पर मौजूद सांड विकास को दिखाई नहीं दिया और कुछ ही सेकंड में उनकी जिंदगी खत्म हो गई। संयोग से उसी समय वहां से गुजर रहे प्रतापगढ़ में कार्यरत मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कमलेश तेतरवाल ने अन्य वाहन चालकों की मदद से विकास को तुरंत राजकीय बीडीके जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने काफी देर तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया। लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। गुरूवार को पोस्टमार्टम के बाद विकास का शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने अपने साथी को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। सजी हुई पुलिस गाड़ी में पार्थिव देह को गांव ले जाया गया। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। विकास वर्ष 2013 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे और पिछले कुछ वर्षों से एसपी कार्यालय में सेवाएं दे रहे थे। उनकी पत्नी अनिता भी पुलिस विभाग में कांस्टेबल हैं। परिवार पुलिस सेवा से जुड़ा हुआ है। उनकी बहन भी कांस्टेबल है। पीछे माता-पिता, पत्नी और दो छोटे बेटे रह गए हैं। इस घटना ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शहर की मुख्य सड़क पर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरूस्त रखना नगर परिषद की जिम्मेदारी है। वहीं बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाना भी स्थानीय निकाय का दायित्व है। लेकिन जब सबसे प्रमुख मार्ग पर ही अंधेरा पसरा हो और बेसहारा सांड खुलेआम घूम रहे हों, तो ऐसी घटनाएं होना तय माना जाता है। अगर सड़क पर पर्याप्त रोशनी होती तो शायद सांड समय रहते दिखाई दे जाता। अगर बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने की व्यवस्था प्रभावी होती तो शायद विकास आज अपने परिवार के बीच होते। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन है? कांस्टेबल विकास की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लापरवाही सिर्फ फाइलों में नहीं होती, कई बार इसकी कीमत किसी परिवार को अपनी पूरी जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है।