किसान परिवार के बेटे ने मेहनत, ईमानदारी और सेवा भाव से खड़ा किया शिक्षा, व्यापार और समाजसेवा का मजबूत साम्राज्य, बेटी ज्योति मित्तल ने किया गर्व; कहा— “पिता ने हमें सिर्फ़ सुविधाएँ नहीं, सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस दिया”
झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाले लोगों की कहानियां अक्सर संघर्षों की तपती भट्टी से निकलकर ही इतिहास बनती हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है श्री संतोष मित्तल की, जिन्होंने एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और ईमानदारी के बल पर शिक्षा, होटल, ट्रांसपोर्ट और अनाज व्यवसाय के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान स्थापित की है। शेखावाटी की धरती पर संघर्ष से सफलता तक का यह सफर आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। बचपन में आर्थिक चुनौतियों के बीच पले-बढ़े संतोष मित्तल ने कभी परिस्थितियों को अपनी मंजिल के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। दिन में पढ़ाई करना और शाम को परिवार की छोटी किराने की दुकान संभालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इतना ही नहीं, मेलों में अपनी दादी द्वारा तैयार किए गए सामान को बेचकर भी उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाया।
संघर्षों से सीखा, मेहनत से मुकाम बनाया
सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। वर्षों की अथक मेहनत, दूरदर्शी सोच और ईमानदार कार्यशैली के दम पर उन्होंने शिक्षा, होटल, ट्रांसपोर्ट और कृषि व्यापार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। आज वे एक सफल उद्यमी के रूप में पहचाने जाते हैं, लेकिन सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी उनकी सादगी और जमीन से जुड़ाव कायम है।
सेवा, संस्कार और संवेदनाओं की मिसाल
संतोष मित्तल की पहचान केवल एक सफल व्यवसायी के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समाजसेवी व्यक्तित्व के रूप में भी है। उनके जीवन की पहली प्राथमिकता अपने माता-पिता की सेवा, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना रही है। उनका मानना है कि जीवन की वास्तविक सफलता केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियां बांटने में है। वे अक्सर कहते हैं, “अपने बच्चों का पालन-पोषण तो हर कोई करता है, लेकिन असली इंसान वही है जो किसी और के जीवन में भी खुशियों का कारण बने।”
बेटियों को दिया शिक्षा और सपनों का अमूल्य उपहार
शेखावाटी पब्लिक स्कूल (एसपीएस) हेतमसर की अकादमिक निदेशक ज्योति मित्तल और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दीपिका मित्तल ने अपने पिता के प्रति भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता ने उन्हें केवल बेहतर जीवन नहीं दिया, बल्कि अच्छी शिक्षा, उच्च संस्कार और बड़े सपने देखने का साहस भी दिया है। दोनों ने कहा कि उनके पिता का संघर्ष, त्याग और समर्पण उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उनका सपना है कि वे अपने पिता के हर अधूरे सपने को पूरा करें और उनके मूल्यों को आगे बढ़ाएं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का संदेश
आज जब युवा सफलता के शॉर्टकट तलाश रहे हैं, ऐसे समय में संतोष मित्तल का जीवन संदेश देता है कि कठिन परिश्रम, ईमानदारी, पारिवारिक संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी ही स्थायी सफलता की असली कुंजी है।
“जो खुद धूप में जलकर भी बच्चों को छांव दे जाए, वही पिता कहलाता है।”
“पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन का सबसे मजबूत विश्वास होते हैं, जिनके संघर्ष की नींव पर बच्चों के सपनों के महल खड़े होते हैं।” ज्योति मित्तल के शब्दों में — “हमें गर्व है कि हम पूरे सम्मान और आत्मगौरव के साथ कह सकती हैं कि श्री संतोष मित्तल मेरे पापा हैं।”










