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झुंझुनूं पोक्सो कोर्ट का नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में बड़ा फैसला

झुंझुनूं नगर निकाय चुनाव 2026 में मतदान को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी की अपील

आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, पीड़िता को 22—23 दिनों तक रखा सीकर में बंधक बनाकर, पड़ौसियों को बताया ‘पत्नी’, लेकिन कमरे से बाहर तक नहीं निकलने दिया

झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
नाबालिग बालिकाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर झुंझुनूं की पोक्सो कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए महज करीब 10 महीने के रिकॉर्ड समय में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका का अपहरण करने, उसे बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी युवक अनिल मीणा को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 1 लाख 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। पोक्सो कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक सुरेंद्र सिंह भांबू ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि करीब 11 महीने पहले जुलाई 2025 गुढ़ागौड़जी थाने में एक पिता ने अपनी बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि 6-7 जुलाई 2025 की दरमियान रात को उनकी 16 साल की नाबालिग बेटी अचानक गायब हो गई। परिजनों ने पोसाना हाल निवासी भोजगढ़ के रहने वाले युवक अनिल मीणा पर शक जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुढ़ागौड़जी पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और करीब 22-23 दिन की तलाश के बाद नाबालिग बालिका को सीकर से दस्तयाब कर आरोपी अनिल मीणा को दबोच लिया। दस्तयाब होने के बाद पीड़िता ने कोर्ट और पुलिस को अपनी दर्द भरी कहानी बताई। उसने बताया कि आरोपी अनिल मीणा उसे बहला-फुसलाकर सीकर ले गया था। वहां उसने लोगों के सामने उसे अपनी पत्नी बताया और एक किराए के कमरे में बंधक बनाकर रख लिया। आरोपी उसके साथ कई बार दुष्कर्म करता था। दरिंदगी की हद यह थी कि जब भी आरोपी बाहर जाता, कमरे का ताला बाहर से बंद कर देता था ताकि पीड़िता भाग न सके। यहां तक कि उसने पीड़िता के पास कोई मोबाइल भी नहीं छोड़ा था। पुलिस ने मामले की त्वरित जांच करते हुए पिछले साल 30 जुलाई को आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद कोर्ट में चालान पेश किया था। अदालत में चले महज करीब 10 महीने के स्पीडी ट्रायल के दौरान 14 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। 31 दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट के सामने पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों को देखने के बाद विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी अनिल मीणा को अपहरण, बंधक बनाने और नाबालिग से दुष्कर्म की धाराओं में दोषी पाया। अदालत ने आरोपी के कृत्य को गंभीर मानते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, विभिन्न धाराओं के तहत कुल एक लाख 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। अर्थदंड न चुकाने पर आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

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