अरड़ावता में भावुक कर देने वाला दृश्य, तीन बेटियों ने समाज को दिया समानता और संस्कारों का संदेश
चिड़ावा।झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
निकटवर्ती गांव अरड़ावता में शनिवार को एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं । समाज में बेटियों की बढ़ती भूमिका और उनके अटूट संस्कारों की मिसाल पेश करते हुए तीन बेटियों ने अपने दिवंगत पिता की अर्थी को कंधा देकर अंतिम विदाई दी तथा पूरे अंतिम संस्कार में शामिल होकर पुत्र धर्म का निर्वहन किया। जानकारी के अनुसार अरड़ावता निवासी दयानंद थाकन (67) का निधन हो गया। वे आयुर्वेद विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे और अपने सरल एवं मिलनसार स्वभाव के कारण क्षेत्र में सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। उनके निधन की खबर से गांव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। शनिवार को जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो उनकी पुत्रियां अनीता, बबीता और दीपिका आगे बढ़ीं और अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद वे पूरे दाह संस्कार की प्रक्रिया में भी शामिल रहीं। यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में मौजूद ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक भावुक हो उठे। ग्रमीणों ने बेटियों के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं और किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। तीनों बेटियों ने अपने पिता के प्रति कर्तव्य और सम्मान का परिचय देते हुए समाज को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया है। अंतिम संस्कार में कुलदीप धनखड़, सोमवीर धनखड़, सुनील धनखड़, दर्शिका, हार्दिक, पूर्वी, भावेश, ध्रुव, राजेश, नवीन, मुकेश, बलबीर, रणधीर, अजय, अभय, डुग्गू, राकेश और अंकित सहित बड़ी संख्या में परिवारजन, ग्रामीण, रिश्तेदार एवं शुभचिंतक मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। अरड़ावता की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बेटियां केवल परिवार का गौरव ही नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में परिवार की सबसे बड़ी ताकत भी होती हैं।










