मार्च 2027 तक जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाएं होंगी “एनक्यूएएस प्रमाणित : सीएमएचओ डॉ. गुर्जर

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गुणवत्ता सुधार पर स्वास्थ्य विभाग का फोकस, ब्लॉक क्वालिटी टीम को दिए फील्ड मॉनिटरिंग और नियमित असेसमेंट के निर्देश

झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित कर मार्च 2027 तक राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम ( एनक्यूएएस ) के तहत प्रमाणित करवाने के लक्ष्य को लेकर शुक्रवार को सीएमएचओ कार्यालय में ब्लॉक क्वालिटी टीम की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों, संस्थागत तैयारियों और गुणवत्ता सुधार गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने कहा कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को एनक्यूएएस प्रमाणन दिलाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रिकॉर्ड संधारण, स्वच्छता व्यवस्था, मरीज हितैषी सेवाओं तथा नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देना होगा। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अरुण अग्रवाल ने ब्लॉक क्वालिटी टीम सदस्यों को एनक्यूएएस से संबंधित दस्तावेज तैयार करने, रिकॉर्ड संग्रहण, स्वास्थ्य संस्थानों के कार्मिकों के फिजिकल सुपरविजन तथा असेसमेंट प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था में गुणवत्ता मानकों की पालना सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और प्रभावी दस्तावेजीकरण बेहद आवश्यक है। वहीं डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ. भंवर लाल सर्वा ने सभी ब्लॉक क्वालिटी टीम सदस्यों को मासिक कार्य योजना तैयार करने और सप्ताह में कम से कम दो दिन फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संस्थाओं को एनक्यूएएस प्रमाणन के लिए तैयार किया जाए तथा प्रत्येक संस्था का चेकलिस्ट के अनुसार असेसमेंट कर रिपोर्ट बीसीएमओ के माध्यम से जिला स्तर पर भिजवाई जाए।बैठक में जिला क्वालिटी टीम के सदस्य सुभाष चंद्र, चंद्र मोहन अग्रवाल, राकेश बुडानिया एवं नीतू ने अधिकारियों और कर्मचारियों को एनक्यूएएस चेकलिस्ट, गुणवत्ता मानकों तथा संस्थागत तैयारियों को लेकर प्रशिक्षण प्रदान किया। बैठक में स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार गतिविधियों को गति देने, नियमित मॉनिटरिंग बढ़ाने तथा मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर विशेष जोर दिया गया।