उम्मीदें टूटीं, सांसें थमीं… फिर मिला नया जीवन: झुंझुनूं के सीकेआरडीएम हॉस्पिटल ने रचा चिकित्सा का चमत्कार

झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
जब हर उम्मीद टूटने लगी थी, जिंदगी की डोर कमजोर पड़ चुकी थी और सांसें थमने के कगार पर थीं—तभी सीकेआरडीएम हॉस्पिटल ने एक मरीज को नया जीवन देकर चिकित्सा जगत में मिसाल कायम कर दी। झुंझुनूं निवासी रामचंद्र के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ । गंभीर हालत में अस्पताल लाए गए रामचंद्र फेफड़ों की विफलता और टीबी जैसी जटिल बीमारियों से जूझ रहे थे। स्थिति इतनी नाजुक थी कि वे खुद से सांस लेने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके थे। जीवन बचाने के लिए डॉक्टरों को उनके गले में छेद कर श्वास नली डालनी पड़ी और उन्हें लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया। हर गुजरता पल चुनौती से भरा था। लेकिन सीकेआरडीएम हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और समर्पित नर्सिंग स्टाफ ने हार नहीं मानी। अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों और 24 घंटे सतत निगरानी के साथ इलाज का ऐसा समन्वय किया गया कि महज एक महीने के भीतर रामचंद्र ने मौत को मात दे दी। वे वेंटिलेटर से मुक्त होकर पूरी तरह स्वस्थ हो गए—यह किसी चमत्कार से कम नहीं।आज रामचंद्र अपने परिवार के साथ सामान्य और खुशहाल जीवन जी रहे हैं। उनकी आंखों में आभार और चेहरे पर नई जिंदगी की मुस्कान साफ झलकती है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के प्रति हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया।अस्पताल के निदेशक डॉ. एलसी ढाका ने बताया कि सीकेआरडीएम हॉस्पिटल में ईसीएचएस, मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना और आरजीएचएस जैसी सरकारी योजनाओं के तहत निशुल्क इलाज और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। यहां 24 घंटे, सातों दिन जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जाता है।

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