


हनुमानगढ़ । हिमांशु मिढ्ढा
एस के फाइनेंस कंपनी से 2017 में लिए गए ऋण को न चुकाने के कारण ऋणी शंकर लाल और ओमप्रकाश के मकान को सरफेसी अधिनियम के तहत माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हनुमानगढ़ के आदेशानुसार जब्त कर लिया गया था जिसे लोगो के भड़कावे में आके शंकरलाल,ओमप्रकाश आदि द्वारा ताले तोड़ कर जबरन कब्जा लिया गया था ,कंपनी द्वारा कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मामला हाई कोर्ट जोधपुर के समक्ष रखा । इस मकान का कब्जा गुरुवार को एस के फाइनेंस के अधिकृत प्रतिनिधि सुशील गोयल की देखरेख में लिया गया।सुशील गोयल ने जानकारी दी कि ऋणी शंकर लाल और ओमप्रकाश ने 2017 में एसके फाइनेंस से ऋण लिया था। बार-बार बकाया राशि की जानकारी और नोटिस जारी करने के बावजूद दोनों व्यक्तियों ने न तो ऋण चुकाया और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया। न्यायालय के आदेश के बाद, मकान को सीज करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। यह कार्रवाई न केवल कंपनी के हितों की रक्षा के लिए की गई, बल्कि यह उन अन्य ऋणधारकों के लिए भी एक चेतावनी है, जो ऋण चुकाने में लापरवाही बरतते हैं। उन्होंने कहा, ष्कंपनी ग्राहकों को सुविधा देने के लिए तत्पर रहती है, लेकिन यदि कोई जानबूझकर अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी हो जाता है।इस कार्रवाई के दौरान एसके फाइनेंस की टीम के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन भी मौजूद रहा, जिससे प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सकी। मकान सीज होने के बाद शंकर लाल और ओमप्रकाश के परिवार को घर खाली करना पड़ा।सरफेसी अधिनियम के तहत यह कार्रवाई ऋणदाताओं को उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती है। यह अधिनियम वित्तीय संस्थानों को ऐसे मामलों में कानूनी अधिकार प्रदान करता है, जहां ऋणधारक बार-बार के अनुरोध के बावजूद ऋण का भुगतान नहीं करते।














