विश्व रेबीज दिवस पर नोरंग राम दयानंद ढूकिया नर्सिंग कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने लिया लोगों को जागरूक करने का संकल्प
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर नोरंग राम दयानंद ढूकिया नर्सिंग कॉलेज में रेबीज के प्रति जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को रेबीज के खतरे, इससे बचाव के उपाय, पशु के काटने अथवा खरोंचने के बाद किए जाने वाले प्राथमिक उपचार तथा समय पर एंटी रेबीज टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ असिस्टेंट प्रोफेसर मों. सलीम ने कहा कि रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित पशु के काटने या खरोंचने से फैल सकती है। उन्होंने बताया कि पशु के काटने की स्थिति में घाव को बिना देरी किए साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए तथा तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। समय पर उचित उपचार और टीकाकरण से रेबीज से बचाव संभव है।
संस्थान के सचिव डॉ. संदीप ढूकिया एवं अध्यक्ष सुनीता ढूकिया ने विद्यार्थियों को रेबीज की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे आमजन को पशु के काटने के बाद लापरवाही नहीं बरतने और तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित करें। साथ ही एंटी रेबीज टीकाकरण के महत्व की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएं। कार्यक्रम में नोरंग राम दयानंद ढूकिया नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं कनिष्का, प्रीती एवं अनामिका ने रेबीज से बचाव के उपायों की जानकारी साझा की।
छात्राओं ने लोगों को रेबीज के प्रति जागरूक करने तथा पशु के काटने की स्थिति में समय पर उपचार के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर कॉलेज के प्राचार्य विवेक त्रिपाठी ने कहा कि रेबीज की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज में सुरक्षित एवं जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने और लोगों तक सही स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर राजेश मांडिया, विष्णु कुमार, नरेन्द्र यादव, डॉ. नितिन, डॉ. कमलेश, डॉ. राकेश कुमार जानु, डॉ. मुकेश सुथार, डॉ. प्रबुद्ध एवं डॉ. सुनील सहित कॉलेज के विद्यार्थी एवं स्टाफ मौजूद रहे।











