रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में जागरूकता कार्यक्रम, मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कपूर थालौर ने मानसिक तनाव, चिंता व अवसाद के लक्षण पहचानने की दी जानकारी
झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
राज्य सरकार की वित्तीय वर्ष 2026 -27 की बजट घोषणा के तहत अवसाद, चिंता एवं आत्महत्या की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे मानसिक स्वास्थ्य माह के अंतर्गत रिजर्व पुलिस लाइन, झुंझुनूं के सभागार में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए तनावपूर्ण परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने और समय पर आवश्यक सहायता लेने के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में पुलिस लाइन सहित जिले के विभिन्न पुलिस थानों एवं कार्यालयों से पुलिस अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे। राजकीय बीडीके अस्पताल, झुंझुनूं के मनोरोग विशेषज्ञ एवं राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी (डीएनओ) डॉ. कपूर थालौर ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। डॉ. कपूर थालौर ने मानसिक तनाव, चिंता एवं अवसाद के लक्षणों को समय रहते पहचानने तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम में बीडीके अस्पताल, झुंझुनूं की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तुलसी शर्मा ने भी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने युवा मन एवं मानसिक स्वास्थ्य, ‘अपने मित्र का सहयोग करें’, ‘गेटकीपर’ यानी मानसिक संकट के संकेत पहचानकर सहायता तक पहुंचाने, परीक्षा तनाव प्रबंधन तथा कार्यस्थल तनाव प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण एवं उपयोगी जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक तनाव, चिंता एवं अवसाद के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। पुलिसकर्मियों को स्वयं के साथ-साथ अपने सहकर्मियों की मानसिक एवं भावनात्मक स्थिति के प्रति भी संवेदनशील रहने की सलाह दी गई। किसी सहकर्मी में तनाव या मानसिक परेशानी के संकेत दिखाई देने पर उससे संवाद करने, भावनात्मक सहयोग देने तथा आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया गया।
तनावपूर्ण ड्यूटी में मानसिक स्वास्थ्य जरूरी
कार्यक्रम में पुलिस सेवा की प्रकृति को देखते हुए कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन के महत्व पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों एवं कार्मिकों को बताया गया कि लगातार कार्य का दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है। समय पर अपनी परेशानी साझा करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, तनाव एवं मानसिक परेशानियों की समय रहते पहचान करने तथा स्वस्थ और तनावमुक्त कार्य वातावरण को बढ़ावा देना रहा।
















