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हनुमानगढ़ में पार्षदों पर दबाव का आरोप, निष्पक्ष मतदान की मांग; आंदोलन की चेतावनी

हनुमानगढ़ में पार्षदों पर कथित दबाव के विरोध में सामाजिक समरसता न्याय मंच के पदाधिकारी

सामाजिक समरसता न्याय मंच ने कहा—दबाव की राजनीति बंद नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे

हनुमानगढ़। सामाजिक समरसता न्याय मंच ने नगर परिषद चुनाव के बाद पार्षदों पर कथित प्रशासनिक एवं राजनीतिक दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए सभी पार्षदों को बिना किसी डर, भय अथवा दबाव के स्वतंत्र रूप से मतदान करने देने की मांग की है। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि नगर परिषद में बोर्ड गठन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और स्वच्छ तरीके से संपन्न होनी चाहिए।

मंच की ओर से जारी बयान में आरोप लगाया गया कि चुनाव से ठीक पहले स्थानीय पार्षदों के घरों पर पुलिस द्वारा बिना किसी ठोस आधार के छापेमारी की जा रही है। वक्ताओं ने इसे राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से की जा रही कार्रवाई बताते हुए आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि निर्वाचित पार्षदों को भयमुक्त वातावरण मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

वक्ताओं ने स्थानीय विधायक के खिलाफ दर्ज मुकदमे को भी राजनीतिक द्वेषता से प्रेरित बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया जा रहा है। मंच ने सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं की कथित गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कानून के निर्धारित प्रावधानों के तहत ही होनी चाहिए।

मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान में सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर राजस्थान, विशेषकर हनुमानगढ़ में दबाव की राजनीति की जा रही है। सामाजिक समरसता न्याय मंच ने भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि यदि पार्षदों पर दबाव बनाने और कथित उत्पीड़न की कार्रवाई तत्काल बंद नहीं हुई तथा नगर परिषद बोर्ड गठन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं करवाई गई तो मंच आम जनता और प्रभावित लोगों को साथ लेकर आंदोलन करेगा।

वक्ताओं ने कहा कि नगर परिषद चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने हनुमानगढ़ को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त करने की बात कही थी, लेकिन अब उनके अनुसार शहर में भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाने तथा निर्वाचित पार्षदों को स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर देने की मांग की।

मंच के अध्यक्ष रामप्रताप उर्फ प्रकाशनाथ ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। उन्होंने प्रशासन से किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त वातावरण में बोर्ड गठन की प्रक्रिया पूरी करवाने की मांग की। मंच ने चेतावनी दी कि मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस मोके पर ओमप्रकाश सैन, दुर्गादत्त सैनी, भदारराम यादव, आरके वर्मा, रामप्रताप भाट, मखन सिंह, पवन कुमार, अशोक कुमार, देवीलाल भाटी, भूपेंद्र लिम्बा, रामस्वरूप नांदेवल, इंदरजीत सिंगला सहित अन्य समाज के लोग मौजूद थे

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