बीडीके अस्पताल के पालना गृह में मिली नवजात की हालत में सुधार, गोद लेने के लिए आगे आने लगे कई परिवार, मदर मिल्क बैंक से मिल रहा पोषण, सीडब्ल्यूसी व कारा के नियमों के तहत होगी आगे की प्रक्रिया
झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
राजकीय बीडीके जिला अस्पताल के पालना गृह में मिली नवजात बच्ची की कहानी अब संवेदनाओं और मानवता का प्रतीक बनती जा रही है। एक ओर जहां जन्म के कुछ ही घंटों बाद उसे अपनो द्वारा पालना गृह में छोड़ दिया गया, वहीं दूसरी ओर उसे अपनाने और नया जीवन देने की इच्छा रखने वाले लोग अस्पताल पहुंचने लगे हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार बच्ची के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि नवजात को भर्ती किए जाने के बाद से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। बच्ची को अस्पताल के मदर मिल्क बैंक से दूध उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उसके स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। फिलहाल उसे पीआईसीयू वार्ड में भर्ती रखा गया है और उसकी स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है। डॉ. भाम्बू ने बताया कि बच्ची के पालना गृह में मिलने की खबर फैलते ही कई लोग अस्पताल पहुंचकर उसे गोद लेने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने सभी इच्छुक लोगों को स्पष्ट किया है कि अस्पताल की भूमिका केवल बच्ची के उपचार और देखभाल तक सीमित है। बच्ची के संरक्षण, पुनर्वास और दत्तक ग्रहण से संबंधित सभी निर्णय बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) झुंझुनूं द्वारा लिए जाएंगे तथा गोद लेने की संपूर्ण प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही पूरी होगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार जब बच्ची को पालना गृह में छोड़ा गया था, उस समय उसकी हालत गंभीर थी। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और उसका वजन मात्र करीब 1.850 किलोग्राम था I चिकित्सकीय जांच के आधार पर अनुमान लगाया गया कि उसका जन्म लगभग 24 से 48 घंटे पहले हुआ था। डॉक्टरों का यह भी मानना है कि उसकी डिलीवरी किसी अस्पताल अथवा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में कराई गई होगी। इस बीच नवजात की स्थिति में हो रहे सुधार और उसे अपनाने के लिए सामने आ रही इच्छाओं ने इस घटना को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया है। जिस मासूम को जन्म देने वालों ने बेसहारा छोड़ दिया, उसी के लिए अब कई परिवार अपना आंगन खोलने को तैयार दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल चिकित्सकों की प्राथमिकता बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ करना है, जबकि उसके भविष्य का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।










