भाजपा में बढ़ी तकरार ! नवलगढ़ विधायक विक्रम जाखल की अनदेखी पर जयपुर में हंगामा, जिलाध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे सवाल!

यमुना जल आभार कार्यक्रम में नाम नहीं पुकारे जाने से समर्थकों का फूटा गुस्सा, विधायक ने भी मंच पर जाने से किया इनकार; हालिया विवादों के बाद संगठन संचालन पर फिर चर्चा तेज

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
यमुना जल परियोजना के नए एमओए के बाद मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में झुंझुनूं भाजपा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई। कार्यक्रम के दौरान नवलगढ़ विधायक विक्रम सिंह जाखल का नाम मंच से संबोधन के लिए नहीं पुकारे जाने के बाद समर्थकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। विरोध इतना बढ़ा कि विधायक विक्रम सिंह जाखल ने भी मंच पर जाने से इनकार कर दिया, जिससे कार्यक्रम में कुछ समय के लिए असहज स्थिति बन गई। घटना ने भाजपा के जिला संगठन की कार्यशैली और समन्वय क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा है कि यदि कार्यक्रम की सूची और प्रोटोकॉल का बेहतर समन्वय होता तो इस प्रकार की स्थिति से बचा जा सकता था।

समर्थकों का आरोप— क्षेत्र के विधायक की हुई उपेक्षा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंच संचालन के दौरान अन्य नेताओं के नाम क्रमवार पुकारे गए, लेकिन नवलगढ़ विधायक विक्रम सिंह जाखल का नाम सूची में नहीं आया। इसे लेकर उनके साथ पहुंचे समर्थकों ने तत्काल विरोध दर्ज कराया। समर्थकों का कहना था कि जिन नेताओं की भूमिका अपेक्षाकृत कम थी, उनके नाम सूची में शामिल थे, जबकि क्षेत्र के निर्वाचित विधायक को नजरअंदाज कर दिया गया। विरोध बढ़ने पर कुछ समर्थक कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल आए और नाराजगी खुलकर सामने आने लगी।

विधायक ने भी जताई नाराजगी, मंच पर जाने से किया इनकार

समर्थकों की नाराजगी के बीच विधायक विक्रम सिंह जाखल ने भी मंच पर जाने से इनकार कर दिया। वे कुछ समय तक अपने समर्थकों के बीच ही रहे। इससे माहौल और अधिक गर्मा गया। बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर विधायक से चर्चा की, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी और कार्यक्रम आगे बढ़ा।

जिलाध्यक्ष की कार्यशैली फिर चर्चा में

राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरी की संगठनात्मक कार्यशैली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम संचालन और नेताओं के समन्वय को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इस ताजा विवाद ने उन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।

पहले भी हो चुकी है चूक, अब फिर उठे सवाल

हाल ही में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस से जुड़े एक प्रेस नोट में कथित रूप से बलिदान दिवस के स्थान पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती का उल्लेख प्रकाशित हो जाने के बाद भी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे। अब यमुना जल आभार कार्यक्रम में विधायक के नाम को लेकर हुए विवाद ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

गुटबाजी की चर्चाओं को मिला नया आधार

हालांकि पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कार्यक्रम में हुई नाराजगी और उसके सार्वजनिक रूप से सामने आने से विपक्ष को भी राजनीतिक टिप्पणी का अवसर मिल सकता है।स्थिति बिगड़ती देख वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल हस्तक्षेप किया और विधायक विक्रम सिंह जाखल व उनके समर्थकों से बातचीत कर माहौल शांत कराया। इसके बाद कार्यक्रम सामान्य रूप से संपन्न हुआ, लेकिन यह घटनाक्रम भाजपा संगठन के भीतर समन्वय और संवाद को लेकर कई सवाल छोड़ गया।