जल जीवन मिशन के दावों पर उठे सवाल ? प्यासा नालपुर: अवैध कनेक्शनों और प्रशासनिक उदासीनता ने छीना ग्रामीणों का पानी

दो माह से बूंद-बूंद को तरस रहे लोग, 10 साल से टूटी टंकी बनी व्यवस्था की नाकामी का स्मारक; ग्रामीणों ने एसडीएम को चेताया—अब नहीं हुआ समाधान तो होगा आंदोलन

खेतड़ी। झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
सरकार भले ही हर घर जल पहुंचाने के दावे कर रही हो, लेकिन खेतड़ी उपखंड का नालपुर गांव इन दावों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पिछले दो माह से गहराए पेयजल संकट ने ग्रामीणों का जीवन बेहाल कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी को तरस रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं।पेयजल संकट से त्रस्त ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था की पोल खोल दी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का आरोप है कि कुम्भाराम योजना की पाइपलाइन में डाडा फतेहपुरा से नालपुर तक कई स्थानों पर अवैध कनेक्शन कर दिए गए हैं, जिसके कारण गांव की मुख्य पानी की टंकी तक पर्याप्त पानी पहुंच ही नहीं रहा। सवाल यह है कि यदि अवैध कनेक्शन वर्षों से चल रहे हैं तो संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया? क्या विभाग की मिलीभगत से गांव का पानी रास्ते में ही गायब हो रहा है?

10 साल से टूटी टंकी, जिम्मेदारों की संवेदनहीनता का प्रतीक

नालपुर की जल समस्या केवल अवैध कनेक्शनों तक सीमित नहीं है। गांव में बनी दो बड़ी पानी की टंकियों में से एक टंकी पिछले करीब दस वर्षों से क्षतिग्रस्त पड़ी है। एक दशक बीत जाने के बाद भी उसका पुनर्निर्माण नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही और जनसमस्याओं के प्रति उदासीनता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते टंकी का निर्माण कर दिया जाता तो आज गांव को इस विकट संकट का सामना नहीं करना पड़ता।ग्रामीणों ने बाबा रामदेव मंदिर के पास स्थित थ्री फेस बोरवेल को असामाजिक तत्वों द्वारा बार-बार नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में रोष और बढ़ गया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

जल जीवन मिशन के दावों पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पहले पनघट योजना के तहत पानी की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब वे जल जीवन मिशन के तहत नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कागजों में योजनाएं सफल दिखाई जा रही हैं, जबकि जमीन पर लोग पानी के लिए भटक रहे हैं।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम

अब पानी दो या आंदोलन झेलो I ग्रामीणों ने एसडीएम से मांग की है कि अवैध कनेक्शनों की तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, क्षतिग्रस्त टंकी का पुनर्निर्माण कराया जाए और गांव में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में रोहिताश, मनीराम, महिपाल, सुरेश, रामपाल, राजेश, ममता, सुशीला, बिमला, भतेरी, चमेली, कमला, रामबाई, लीलावती, शर्मिला, कमलेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।