भक्ति की बयार में डूबा झुंझुनूं, श्रीकृष्ण लीलाओं के रस में सराबोर हुए श्रद्धालु

पाटोदिया परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में उमड़ा जनसैलाब, व्यास दुर्गादत्त बोले— “ईश्वर को पाने का सबसे सरल मार्ग केवल भक्ति”

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
आध्यात्मिक चेतना और भक्ति रस से सराबोर झुंझुनूं इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा की अलौकिक छटा में डूबा हुआ है। स्मृतिशेष सुवादेवी एवं डूंगरमल पाटोदिया की पावन स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस शुक्रवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इन्द्रदेव की मेहरबानी के बीच भक्तों का उत्साह और भी दोगुना नजर आया। प्रख्यात कथा व्यास दुर्गादत्त व्यास (बीकानेर) ने श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध की कथा का रसपूर्ण एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर के समीप ले जाने वाले दिव्य सोपान हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर को पाने का सबसे सरल, सहज और प्रभावी मार्ग केवल “भक्ति” है। कथाव्यास ने बाल कृष्ण की माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह ईश्वर के सुलभ, सरल और मधुर स्वरूप का प्रतीक है, जबकि गोवर्धन धारण और असुरों के संहार की लीलाएं यह संदेश देती हैं कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में तत्पर रहते हैं। रास लीला की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए व्यासजी ने कहा कि यह लौकिक प्रेम नहीं, बल्कि जीवात्मा के परमात्मा में पूर्ण समर्पण और विलय की दिव्य अवस्था है। यह अहंकार त्यागकर ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक है। इसी क्रम में भ्रमर गीत प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गोपियों का निष्कलुष प्रेम उद्धव के ज्ञान और तर्क पर भारी पड़ता है। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि ईश्वर पांडित्य या शुष्क ज्ञान से नहीं, बल्कि निर्मल हृदय और सच्ची व्याकुलता से प्राप्त होते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष करते रहे। इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल और दिव्य स्वरूप प्रदान करने में सुशीला देवी एवं जुगलकिशोर पाटोदिया के मार्गदर्शन में संपूर्ण पाटोदिया परिवार तन-मन-धन से समर्पित भाव से जुटा हुआ है। सेवा कार्य में नथमल-श्रवणी देवी पाटोदिया, मनभरी देवी पाटोदिया, जगदीशप्रसाद-कौशल्या देवी, रामानंद-रेखा पाटोदिया, पवन कुमार-सुनिता देवी, सुरेश कुमार-शशि देवी, प्रमोद, अनिल-अर्चना, प्रदीप-संगीता, राजेश-संगीता, पंकज-मंजू, डॉ. मधुसुदन-डॉ. मोनिका, अंशुल-डॉ. ज्योति, अमित-दिपिका, अंकित-रेशु पाटोदिया सहित समस्त परिजन और मित्रगण पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ सेवाभाव में जुटे हुए हैं। कथा में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। किशोरी टीबड़ा, सुरेश मोदी, रवि रुंगटा मंड्रेला, विशाल ढेढिया, विकास ढेढिया, हरिश जगनानी, अनिल सैनी, मनोज तुलस्यान, नरेंद्र मोदी, संदीप ढेढिया, राजेश ढेढिया एवं प्रमोद खंडेलिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।