सुलताना I झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
तीन दिनों तक रिश्तों की मिठास, परंपराओं की सुगंध और राजस्थानी संस्कृति की जीवंत छटा बिखेरने के बाद सुलताना कस्बे में आयोजित बाईसा स्नेह मिलन समारोह का समापन अत्यंत भावुक वातावरण में हुआ। जैसे ही दूर-दराज से आईं बहन-बेटियों की विदाई का क्षण आया, पूरा परिसर अपनत्व और बिछड़न की भावनाओं से भर उठा और कई आंखें नम हो गईं।
देव दर्शन से शुरू हुआ समापन, वृंदावन और पंच पेड़ में उमड़ा श्रद्धा भाव
समापन दिवस की शुरूआत देव दर्शन कार्यक्रम से हुई, जिसके तहत सभी बहन-बेटियां वृंदावन धाम पहुंचीं और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा पुरूषोत्तम की तपोस्थली पंच पेड़ पहुंचकर श्रद्धा और आस्था के साथ दर्शन किए गए।
गाजे-बाजे और पुष्पवर्षा से हुआ भव्य स्वागत, 300 बहन-बेटियों का हुआ सम्मान
मालुपुरा रोड स्थित जमवाय माता गेस्ट हाउस में आगमन के समय बहन-बेटियों का गाजे-बाजे, पुष्पवर्षा और आत्मीय स्वागत किया गया। सुलताना संस्थापक हाथीराम जी के परिवार की ओर से आयोजित इस समारोह में राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से आई करीब 300 विवाहित बहन-बेटियों को पारंपरिक सम्मान और उपहार प्रदान किए गए।
संस्कृति, अपनापन और स्मृतियों का संगम बना आयोजन
तीन दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिभागियों ने अपने बचपन की यादों को फिर से जीया। कई महिलाओं ने वर्षों बाद अपने मायके और गांव से जुड़े अनुभव साझा किए, जिससे माहौल पूरी तरह भावनात्मक हो उठा। वापसी पर पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों—दाल-बाटी-चूरमा सहित विभिन्न पकवानों का सामूहिक भोज आयोजित हुआ। वहीं सांस्कृतिक संध्या में घूमर, लोकगीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सव और उल्लास से भर दिया।
देशभर से पहुंचीं बहन-बेटियां, बना भावनाओं का महासंगम
इस समारोह में बाड़मेर, करौली, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, जैसलमेर, राजसमंद, सिरोही, चूरू, नागौर, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर और सीकर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में बहन-बेटियों ने भाग लिया। कई प्रतिभागी दशकों बाद अपने मायके पहुंचीं, जिससे यह आयोजन केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि भावनात्मक पुनर्मिलन का महोत्सव बन गया।
विदाई के समय भावुक दृश्य, उपहारों संग दी गई सम्मानपूर्वक विदाई
समापन अवसर पर सभी बहन-बेटियों को सुलताना संस्थापक हाथीराम जी की तस्वीर, धार्मिक पुस्तकें और उपहार भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। विदाई के क्षणों में जहां अपनापन और स्मृतियों की मिठास थी, वहीं बिछड़ने का दर्द भी स्पष्ट झलक रहा था।आयोजकों ने कहा कि बाईसा स्नेह मिलन का उद्देश्य समाज की बहन-बेटियों को एक मंच पर जोड़कर पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक एकता और राजस्थानी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।









