जटायु के बलिदान और हनुमान मिलन प्रसंग से भाव-विभोर हुआ रामलीला मैदान

सप्तम दिवस की रामकथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाराज धर्मदास जी ने सुनाया त्याग, धर्म और भक्ति का मार्मिक संदेश

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
शहर के चूना चौक स्थित रामलीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास महाराज धर्मदास जी ने भगवान श्रीराम, माता जानकी, जटायु और हनुमान जी के प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक एवं ओजस्वी वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा पांडाल में देर रात तक “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजते रहे तथा श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। कार्यक्रम संयोजक महेश बसावतिया ने बताया कि कथा के दौरान महाराज धर्मदास जी ने कहा कि स्वर्ण मृग के मोह में माता सीता ने भगवान श्रीराम को उसके पीछे भेजा तथा बाद में लक्ष्मण जी को भी श्रीराम की खोज में जाने के लिए हठ किया। लक्ष्मण के वन से बाहर जाते ही रावण साधु वेश में आया और माता जानकी का हरण कर पुष्पक विमान से लंका की ओर रवाना हो गया। कथा व्यास ने अत्यंत भावुक शैली में जटायु प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब जटायु ने माता जानकी को रावण के चंगुल में जाते देखा तो उसने अपने प्राणों की चिंता किए बिना रावण को ललकार दिया। धर्म और नारी सम्मान की रक्षा के लिए जटायु ने रावण से भीषण युद्ध किया, लेकिन रावण ने तलवार से उसका पंख काट दिया, जिससे वह घायल होकर धरती पर गिर पड़ा। महाराज धर्मदास जी ने कहा कि जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज में वन-वन भटकते हुए जटायु के पास पहुंचे, तब जटायु ने अंतिम क्षणों में पूरी घटना का वर्णन किया। भगवान श्रीराम ने जटायु को अपने पिता तुल्य मानकर उसे मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर कथा पांडाल में उपस्थित अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।कथा के आगे के प्रसंग में महाराज धर्मदास जी ने बताया कि माता जानकी की खोज करते हुए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट हनुमान जी से हुई। भगवान ने हनुमान जी को पूरी घटना सुनाई, जिसके बाद रामभक्ति, सेवा और समर्पण की अद्भुत गाथा प्रारंभ हुई।कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजन स्थल को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं धार्मिक झांकियों से सजाया गया, जिससे पूरा रामलीला मैदान आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया। इस अवसर पर विनोद पुजारी, पवन शर्मा देरवाला, शिवचरण पुरोहित, बालमुकुंद शर्मा, गोपीराम पुरोहित, मोहन पुरोहित, संजय भार्गव, पूर्व पार्षद विनोद सिंघानिया, पवन पंसारी, बाबूलाल सैनी सांखला, वशिष्ठ कुमार शर्मा, योगेश चोमाल, सुरेंद्र भीमसरिया, पवन पुजारी, रामचंद्र पाटोदा, अमित पांडे, सौरभ जोशी, प्रवीण शर्मा, अंकित शर्मा, विवेक बावलिया, लीलाधर पुरोहित सहित शहर के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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