512 से अधिक मरीजों का उपचार कर एक माह की दवाइयां वितरित, मिर्गी को लेकर भ्रांतियां दूर करने का दिया संदेश
चूरू। मिर्गी रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और बीमारी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से पिछले 32 वर्षों से निरंतर निशुल्क मिर्गी निदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी सेवा अभियान के तहत रतननगर में 386वां निशुल्क मिर्गी निदान शिविर आयोजित हुआ। शिविर में 512 से अधिक मरीजों का उपचार किया गया और उन्हें एक माह की दवाइयां निशुल्क वितरित की गईं।
त्रिवेणी देवी सुरेका चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में इसकी इकाई एपिलेप्सी केयर एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से यह शिविर प्रत्येक माह के पहले मंगलवार को आयोजित किया जाता है। इन शिविरों के माध्यम से मिर्गी रोगियों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें बीमारी के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
जागरूकता के साथ व्यवहार में बदलाव जरूरी
शिविर के मुख्य न्यूरोफिजिशियन डॉ. आर.के. सुरेका ने कहा कि मिर्गी के प्रति जागरूकता का उद्देश्य केवल बीमारी की जानकारी देना नहीं, बल्कि जागरूकता को व्यवहार में लाकर प्रभावी कार्रवाई करना भी है। इसके लिए जरूरी है कि प्रत्येक गांव में मिर्गी की पहचान हो, हर परिवार को दौरा पड़ने की स्थिति में सही प्राथमिक सहायता की जानकारी हो और प्रत्येक रोगी को नियमित उपचार मिल सके।
उन्होंने कहा कि सही निदान और नियमित उपचार से अधिकांश मिर्गी रोगियों के दौरों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास, सामाजिक कलंक, जानकारी का अभाव और उपचार की सीमित उपलब्धता के कारण कई रोगी उचित चिकित्सा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में मिर्गी को लेकर गलत धारणाओं को दूर करना और रोगियों को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
दौरा पड़ने पर प्राथमिक सहायता की जानकारी जरूरी
डॉ. सुरेका ने मिर्गी का दौरा पड़ने की स्थिति में प्राथमिक सहायता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे समय में घबराने के बजाय रोगी की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। रोगी को सुरक्षित स्थान पर करवट से लिटाएं और उसके सिर के नीचे कोई मुलायम वस्तु रखें। साथ ही दौरे की अवधि पर नजर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर चिकित्सक को सही जानकारी दी जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दौरे के दौरान रोगी के मुंह में चम्मच, पानी, कपड़ा या अन्य कोई वस्तु नहीं डालनी चाहिए। इसी प्रकार हाथ-पैरों को जबरदस्ती पकड़कर रोकने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए। यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक जारी रहे तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
मिर्गी अभिशाप नहीं, उपचार योग्य बीमारी
डॉ. सुरेका ने कहा कि मिर्गी न तो कोई अभिशाप है और न ही छुआछूत अथवा भूत-प्रेत से जुड़ी बीमारी। यह मस्तिष्क से संबंधित एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका उचित उपचार संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाएं, उन्हें सामाजिक रूप से अलग न करें और नियमित उपचार के लिए प्रोत्साहित करें।उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, सही प्राथमिक सहायता, नियमित दवाइयां और सामाजिक सहयोग मिर्गी रोगियों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।एपिलेप्सी केयर एंड रिसर्च फाउंडेशन ने मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रोगियों तक उपचार पहुंचाने के अपने संकल्प को दोहराते हुए संदेश दिया—“मिर्गी से डर नहीं, सही जानकारी, सही प्राथमिक सहायता और सही उपचार।”शिविर के सफल आयोजन में श्री प्रकाश सुरेका, डॉ. रोहित सुरेका, डॉ. रक्षित सुरेका, डॉ. जयसिंह, डॉ. सरीन, डॉ. गौरी, ताजू खान सहित अन्य सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।













