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एफआईआर 462/2026 में पूर्व आईओ गुरदेव सिंह के निलंबन की मांग, एसपी को सौंपा ज्ञापन

एफआईआर 462/2026 मामले में पूर्व आईओ गुरदेव सिंह के निलंबन की मांग को लेकर एसपी को ज्ञापन देते अधिवक्ता

अधिवक्ताओं ने तत्कालीन जांच अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, अधिवक्ताओं ने दी वर्क सस्पेंड की चेतावनी

हनुमानगढ़। एफआईआर संख्या 462/2026 थाना हनुमानगढ़ जंक्शन की निष्पक्ष जांच करवाने तथा तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी उपनिरीक्षक गुरदेव सिंह की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निलंबन की मांग को लेकर अधिवक्ता जोधा सिंह ने बार संघ के अधिवक्ताओं के साथ मंगलवार को जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रकरण की जांच स्थानीय प्रभाव एवं पूर्वाग्रह से मुक्त किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र पुलिस अधिकारी से करवाने की मांग की गई।

ज्ञापन में अधिवक्ता जोधा सिंह ने बताया कि वह हनुमानगढ़ न्यायालय परिसर में नियमित रूप से विधि व्यवसाय करते हैं तथा हेमसिंह उनके पास मुंशी के रूप में कार्य करता है। उनके अनुसार थाना हनुमानगढ़ जंक्शन में 4 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर में हेमसिंह को आरोपी बनाया गया है। ज्ञापन में कहा गया कि एफआईआर में अधिवक्ता जोधा सिंह को प्रत्यक्ष आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन उनके मुंशी के साथ व्यावसायिक संबंध का उल्लेख होने से उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा और छवि प्रभावित होने की आशंका है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी उपनिरीक्षक गुरदेव सिंह द्वारा मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गई तथा शिकायतकर्ता रोहित सिंह खींची के साथ कथित मिलीभगत कर प्रार्थी को झूठे तरीके से फंसाने का प्रयास किया गया। अधिवक्ताओं ने मांग की कि इस आरोप की भी स्वतंत्र जांच करवाई जाए। ज्ञापन के अनुसार उपनिरीक्षक गुरदेव सिंह वर्तमान में गोलूवाला कैचियां में कार्यरत हैं।

प्रार्थी ने मामले से जुड़े कथित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच, हस्ताक्षरों एवं नोटरी मोहर का वैज्ञानिक सत्यापन तथा मूल दस्तावेजों की बरामदगी और जांच करवाने की मांग की। साथ ही घटना से जुड़े व्यक्तियों के स्वतंत्र बयान दर्ज करने, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, व्हाट्सऐप संदेश, इलेक्ट्रॉनिक संचार, कॉल रिकॉर्ड एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई। कथित स्वीकारोक्ति किन परिस्थितियों में हुई और उस पर किसी प्रकार का दबाव या प्रभाव था या नहीं, इसकी भी जांच की मांग की गई।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रार्थी को धमकियां एवं दबाव दिए जाने की शिकायत है तथा भविष्य में झूठे मुकदमों में फंसाए जाने की आशंका जताई गई है। ऐसे में पुलिस प्रशासन से प्रार्थी की सुरक्षा के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई।अधिवक्ताओं ने कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी पुलिस अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अधिवक्ता समुदाय में रोष है। उन्होंने मांग की कि जांच प्रभावित होने की किसी भी संभावना को रोकने के लिए तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी की भूमिका की जांच कर नियमानुसार निलंबन अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की जाए।

इस दौरान समस्त अधिवक्ताओं ने कहा कि अगर पूर्व आईओ गुरदेव सिंघ को निम्बित नही किया गया तो समस्त अधिवक्ता वर्क सस्पेंड करेंगे। अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। इस मौके पर बार संघ उपाध्यक्ष गुरदेव सिंह, सचिव हेमराज वाधवा, पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सारस्वत, रघुवीर वर्मा , मुकेश देहडू, प्रदीप थिंद, प्रधुम्न सिंह परमार, सोम शर्मा, रामकुमार कस्वा, हेमलता खिच्ची, शालू रानी, परमजीत यादव, नवदीप कड़वासरा, सन्नी नागपाल, नितिन गोयल, सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।

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