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Home राजस्थान झुंझुनूं झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस की वापसी, निर्दलीयों का दबदबा; भाजपा पिछड़ी

झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस की वापसी, निर्दलीयों का दबदबा; भाजपा पिछड़ी

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555 वार्डों में निर्दलीय 203 सीटों के साथ सबसे बड़ा समूह, कांग्रेस 194 पर पहुंची; भाजपा को 157 सीटें—19 निकायों में सत्ता की चाबी कई जगह निर्दलीयों के हाथ
झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस 30 पर, बहुमत से सिर्फ एक कदम दूर; खेतड़ी, पिलानी व विद्याविहार में निर्दलीयों का कब्जा, भाजपा को बिसाऊ-जाखल और कांग्रेस को मंडावा-नवलगढ़ में स्पष्ट बहुमत

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
जिले की 18 नगरपालिकाओं और झुंझुनूं नगर परिषद सहित 19 नगरीय निकायों के सोमवार को घोषित हुए चुनाव परिणामों ने जिले की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। 555 वार्डों के सामने आए पार्टीवार परिणामों में निर्दलीयों ने 203 सीटें जीतकर सबसे बड़ा समूह बनाया है, जबकि राजनीतिक दलों में कांग्रेस 194 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा को 157 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। माकपा (सीपीआईएम) को उदयपुरवाटी में एक सीट मिली है। यानी पूरे जिले का चुनावी संदेश साफ है—कांग्रेस ने भाजपा पर बढ़त बनाई, लेकिन किसी एक दल के बजाय निर्दलीयों ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर शहरी राजनीति की दिशा तय करने की ताकत हासिल कर ली।

कांग्रेस ने भाजपा को 37 सीटों से पछाड़ा

कुल 555 सीटों के आंकड़ों में कांग्रेस को 194, भाजपा को 157 और निर्दलीयों को 203 सीटें मिलीं। इस लिहाज से कांग्रेस ने भाजपा से 37 सीट अधिक जीती हैं। लेकिन निर्दलीय कांग्रेस से भी 9 सीट आगे हैं। राजनीतिक तौर पर इसे कांग्रेस की जिले में मजबूत वापसी के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि भाजपा के लिए कई निकायों में पार्टी प्रत्याशियों के बजाय स्थानीय और निर्दलीय चेहरों का मजबूत प्रदर्शन चुनौती बनकर सामने आया है।

कहां किसका पलड़ा भारी, किसका बोर्ड लगभग तय?

1. बगड़—निर्दलीयों का पलड़ा भारी

20 वार्डों में निर्दलीयों ने 11 सीटें, भाजपा ने 6 और कांग्रेस ने 3 सीटें जीतीं। बहुमत का आंकड़ा 11 है। इसलिए निर्दलीय अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं।

2. बिसाऊ—भाजपा का स्पष्ट बहुमत

25 वार्डों में भाजपा ने 13, कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। बहुमत का आंकड़ा भी 13 है। इसलिए भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति सबसे मजबूत है।

3. बुहाना—भाजपा आगे, निर्दलीय निर्णायक

भाजपा 9, कांग्रेस 8 और निर्दलीय 3 पर हैं। बहुमत के लिए 11 चाहिए। भाजपा को बोर्ड के लिए कम से कम 2 निर्दलीयों का समर्थन हासिल करना होगा। यहां निर्दलीय किंगमेकर हैं।

4. चिड़ावा—निर्दलीयों का तूफानी प्रदर्शन

45 में निर्दलीय 22, कांग्रेस 13 और भाजपा 10 पर है। बहुमत 23 का है। निर्दलीय सिर्फ एक सीट दूर हैं। एकजुट रहे तो बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं; अन्यथा किसी दल के साथ गठजोड़ निर्णायक होगा।

5. डूंडलोद—निर्दलीय सबसे मजबूत

20 में निर्दलीय 10, कांग्रेस 8 और भाजपा 2। बहुमत 11 है। निर्दलीय बहुमत से एक कदम दूर हैं और एक समर्थन से बोर्ड का गणित बदल सकता है।

6. जाखल—भाजपा का दबदबा

20 में भाजपा ने 15 सीटें जीतीं। कांग्रेस 4 और निर्दलीय 1 पर रहे। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है, इसलिए भाजपा का बोर्ड लगभग तय माना जा सकता है।

7. झुंझुनूं नगर परिषद—कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी

60 वार्डों में कांग्रेस 30, भाजपा 15 और निर्दलीय 15 पर हैं। बहुमत का आंकड़ा 31 है। कांग्रेस को सिर्फ एक पार्षद के समर्थन की जरूरत है। इसलिए झुंझुनूं शहर में कांग्रेस बोर्ड बनाने की सबसे मजबूत स्थिति में है। भाजपा के 15 और निर्दलीयों के 15 को जोड़ने पर भी आंकड़ा 30 ही बैठता है। ऐसे में भाजपा को सत्ता तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ेगा।

8. खेतड़ी—निर्दलीयों का स्पष्ट बहुमत

25 में निर्दलीयों ने 13, भाजपा 8 और कांग्रेस 4 सीटें जीतीं। बहुमत 13 है। यानी निर्दलीयों का बोर्ड अपने दम पर बन सकता है।

9. मलसीसर—कांग्रेस आगे, एक समर्थन जरूरी

20 में कांग्रेस 10, भाजपा 7 और निर्दलीय 3 पर हैं। बहुमत 11 है। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है और एक सीट के समर्थन से बोर्ड बना सकती है।

10. मंडावा—कांग्रेस का मजबूत किला

25 में कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं। भाजपा 6 और निर्दलीय 3 पर हैं। कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत है। कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग तय।

11. मंड्रेला—निर्दलीयों की बढ़त

25 में निर्दलीय 11, कांग्रेस 8 और भाजपा 6 बहुमत 13 का है। निर्दलीय सबसे बड़ा समूह हैं, लेकिन बोर्ड के लिए दो अतिरिक्त समर्थन चाहिए।

12. मुकुंदगढ़—कांग्रेस और निर्दलीय बराबर

25 में कांग्रेस 10 और निर्दलीय 10, भाजपा 5 पर है। बहुमत 13 का है। यहां कांग्रेस और निर्दलीय बराबरी पर हैं। दोनों में से जो खेमे को जरूरी समर्थन मिलेगा, वही बोर्ड गठन की दौड़ में आगे होगा।

13. नवलगढ़—कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत

45 में कांग्रेस 24, भाजपा 15 और निर्दलीय 6 पर हैं। बहुमत 23 है। कांग्रेस ने बहुमत से अधिक सीटें जीतकर बोर्ड का रास्ता साफ कर लिया है।

14. पिलानी—निर्दलीयों की ऐतिहासिक बढ़त

35 में निर्दलीयों ने 30 सीटें जीत लीं। भाजपा 3 और कांग्रेस सिर्फ 2 पर सिमटी। बहुमत 18 है। निर्दलीयों का स्पष्ट बहुमत, यहां राजनीतिक दलों पर निर्दलीयों की भारी बढ़त रही।

15. सिंघाना—कांग्रेस और निर्दलीय बराबरी पर

35 में कांग्रेस 13, निर्दलीय 13 और भाजपा 9 सीटों पर है। बहुमत 18 का है। यहां दोनों बड़े खेमों को अतिरिक्त समर्थन चाहिए। निर्दलीय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।

16. सुल्ताना—कांग्रेस सबसे आगे

25 में कांग्रेस 12, निर्दलीय 7 और भाजपा 6 पर हैं। बहुमत 13 है। कांग्रेस को एक सीट का समर्थन मिलते ही बोर्ड का गणित उसके पक्ष में जा सकता है।

17. सूरजगढ़—निर्दलीय आगे

25 में निर्दलीय 11, भाजपा 8 और कांग्रेस 6 पर हैं। बहुमत 13 है। निर्दलीय सबसे बड़ा समूह हैं और दो अतिरिक्त समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाने की स्थिति में आ सकते हैं।

18. उदयपुरवाटी—सबसे पेचीदा समीकरण

35 में निर्दलीय 13, कांग्रेस 11, भाजपा 10 और माकपा 1 सीट पर है। किसी को बहुमत नहीं मिला। यहां निर्दलीय सबसे बड़ा समूह हैं, लेकिन बहुमत 18 के लिए 5 अतिरिक्त समर्थन चाहिए। कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीयों के बीच जोड़-तोड़ के समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।

19. विद्याविहार—निर्दलीयों का एकतरफा दबदबा

25 में निर्दलीयों ने 21 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। भाजपा को 4 और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। यहां निर्दलीयों का स्पष्ट बहुमत है।

बोर्ड गठन की तस्वीर—कहां साफ, कहां सस्पेंस?

भाजपा का स्पष्ट बहुमत — बिसाऊ, जाखल नगर पालिका
कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत — मंडावा, नवलगढ़ नगर पालिका
निर्दलीयों का स्पष्ट बहुमत — बगड़, खेतड़ी, पिलानी, विद्याविहार नगर पालिका
कांग्रेस बहुमत से 1 दूर — झुंझुनूं नगर परिषद , मलसीसर, सुल्ताना नगर पालिका
भाजपा बहुमत से 2 दूर — बुहाना नगर पालिका
निर्दलीय बहुमत से 1 दूर — चिड़ावा, डूंडलोद

नगर पालिका

निर्दलीय बहुमत से 2 दूर — मंड्रेला, सूरजगढ़ नगर पालिका
कांग्रेस-निर्दलीय आमने-सामने — मुकुंदगढ़, सिंघाना नगर पालिका
त्रिकोणीय/पेचीदा समीकरण — उदयपुरवाटी नगर पालिका

कांग्रेस के लिए राहत, भाजपा के लिए मंथन और निर्दलीयों के लिए सत्ता का मौका

जिले के चुनाव परिणामों का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश यह है कि कांग्रेस ने भाजपा से अधिक सीटें जीतकर जिले की 19 निकायों में पार्टी के रूप में बढ़त बना ली है, लेकिन सत्ता का पूरा रास्ता उसके लिए भी आसान नहीं है। कांग्रेस के खाते में 194 सीटें आने से पार्टी का प्रदर्शन भाजपा से स्पष्ट रूप से बेहतर रहा है। खासतौर पर झुंझुनूं, मंडावा, नवलगढ़, सुल्ताना, मलसीसर और सिंघाना जैसे निकायों में कांग्रेस मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। दूसरी ओर भाजपा ने बिसाऊ और जाखल में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि बुहाना में भी वह सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन कई निकायों में भाजपा के सामने निर्दलीयों का मजबूत प्रदर्शन चुनौती बन गया है। सबसे बड़ा राजनीतिक उभार निर्दलीयों का है। 203 सीटों के साथ निर्दलीय जिले में सबसे बड़ा चुनावी समूह हैं। खेतड़ी, पिलानी और विद्याविहार में उन्होंने सीधे बहुमत हासिल किया, जबकि चिड़ावा, डूंडलोद, मंड्रेला, सूरजगढ़, बगड़ और उदयपुरवाटी नगर पालिका में भी उनका दबदबा रहा।

झुंझुनूं की शहरी सत्ता का नया समीकरण: पार्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे पार्षद

इन परिणामों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अब नगर निकायों की राजनीति केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रहेगी। कई जगह अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक होगा।झुंझुनूं नगर परिषद इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कांग्रेस 30 सीटों के साथ बहुमत से सिर्फ एक कदम दूर है। ऐसे में एक निर्दलीय का समर्थन कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचा सकता है। दूसरी तरफ भाजपा और निर्दलीयों की मौजूदा संख्या जोड़ने पर भी बहुमत नहीं बनता। यानी झुंझुनूं जिले की 19 निकायों का जनादेश कह रहा है—कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, निर्दलीय सबसे बड़ा समूह और भाजपा को कई जगह नए सियासी समीकरण साधने होंगे।अब नजरें अध्यक्ष पद के चुनाव, निर्दलीय पार्षदों के रूख और दलों की रणनीतिक लामबंदी पर रहेंगी। वार्डों में जनता ने जो जनादेश दिया है, उसका अंतिम राजनीतिक रूप अध्यक्ष चुनाव में सामने

555 सीटों का जिलेवार राजनीतिक गणित

झुंझुनूं जिले की 19 नगर निकायों में निर्दलीय : 203 , कांग्रेस : 194 , भाजपा : 157
माकपा : 1 सीटों पर जीती I

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