हिमालय परिवार, श्रीगंगानगर : लेह-लद्दाख में गूंजा हल्दी घाटी की माटी का शौर्य

जगराज गौड़ I चूरू

हिमालय परिवार की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा लेह- लद्दाख में आयोजित प्रथम सिन्धु कुम्भ हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर 30 वी सिन्धु दर्शन यात्रा जिसे विशेष रूप से प्रथम सिन्धु कुम्भ के रूप मे आयोजित किया गया था में भारत के महामहिम उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन,लेह- लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना,पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, 10 देशों के राजदूत,अनेक राष्ट्रीय नेता ,राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संत समाज एवं देश- विदेश से आए हजारों श्रद्धालू उपस्थित रहे। जो सिन्धु संस्कृति एवं एकता के इस महापर्व के साक्षी बने। प्रथम सिन्धु कुम्भ का भव्य शुभारम्भ एन.डी.एस.मेमोरियल ग्राउण्ड लेह में हजारों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति में एकता और संस्कृति का अद्भुत संगम बना। समारोह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं हिमालय परिवार के राष्ट्रीय संरक्षक इन्द्रेश कुमार के मुख्य आतिथ्य में प्रारम्भ हुआ। इन्द्रेश कुमार नें महामहिम उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन,10 देशों के राजदूतों एवं विभिन्न राज्यों के राज्यपाल का इस अवसर पर मुलाकात कर अभिनंदन किया। सुदूर लेह में राजस्थान की हल्दी घाटी से गए पवित्र माटी के कलशो का विधि-विधान से पूजन कर माटी के पाउच एवं महाराणा प्रताप के जीवन वृत्त से संबंधित पत्रक हजारों श्रद्धालुओं को वितरित कर हल्दी घाटी की माटी से सबका तिलक किया गया। लेह- लद्दाख की रहस्यमयी और पावन धरा पर सिन्धु दर्शन यात्रा एक सफर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा ,दिल थामने वाले रोमांच और धड़कनों के करीब आने का एक जादुई किस्सा बन गया। सिन्धु घाट पर सजे मंच पर जब कलाकारों नें राजस्थान के प्रसिद्ध घूमर ,कालबेलिया,ओडिशा के पारंपरिक ओडिसी और गौरीपुआ,गुजरात के ऊर्जावान गरबा और डांडिया रास नृत्य, पंजाब के भंगड़ा और अनेक राज्यों के कलाकारों की प्रस्तुतियों नें समा बाँध दिया। हिमालय परिवार के राष्ट्रीय संरक्षक इन्द्रेश कुमार नें अपने व्याख्यान में बताया कि 30 वर्षों में पहली बार प्रथम सिन्धु कुम्भ के अवसर पर सिन्धु महाआरती हुई है जिसमें एक साथ हजारों श्रद्धालू शामिल हुए है। सिन्धु घाट पर सिर पर मंगल कलश धारण किए सिन्धु मैया के नीले, बर्फीले पानी से कलश भरने की रस्म के समय ऐसा लग रहा था कि जैसे समय रुक गया हो। सुहाने, मखमली और कंपा देने वाले ठंडे मौसम के बीच हर रोज रात्री में जब गरमा गरम पूरियां, महकते हुए बासमती चावल, लजीज पनीर, दाल, मुह में पिघल जाने वाले पेठे का हलवा जन्नत से कम नजर नहीं आता था। हिमालय परिवार श्रीगंगानगर के जिलाध्यक्ष मुनीश कुमार लड्ढा नें बताया कि देश -विदेश से आए हजारों यात्रियों के बीच राजस्थान से गए 326 यात्री अपने सेवाभाव के कारण अपनी अलग ही पहचान छोड़ गए। बीकानेर संभाग से गए 38 यात्री हिमालय परिवार की राजस्थान प्रदेश पदाधिकारी सुषमा बिस्सा, एवं श्रीगंगानगर से गए यात्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक अमर चंद बोरड़ के नेतृत्व में प्रथम सिन्धु कुम्भ में शामिल हुए। राजस्थान के सभी यात्रियों का मार्गदर्शन हिमालय परिवार के प्रदेश महामंत्री अरविन्द जारोली नें किया। राजस्थान के निवासी और वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के साथ लगातार राजस्थान के यात्रियों ने अपने अनुभव सांझा किए और उनसे भी विशेष मार्गदर्शन लिया। प्रथम सिन्धु कुम्भ की समाप्ति के कारण देश- विदेश से लेह- लद्दाख आए यात्रियों का अपने घरों में लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। श्रीगंगानगर से गए यात्रियों में अमर चंद बोरड़, श्रीमती सरला बोरड़ ,रामअवतार सिंह, पवन रतवाया, भूराराम वर्मा, धर्मवीर भारद्वाज, सुष्मिता मनोज दुग्गड़,अंशुमान बोरड़, दिव्यांश मनोज दुग्गड़ सुरक्षित श्रीगंगानगर लौट आए है।