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ईडब्ल्यूएस आरक्षण की खामियां दूर करने की मांग, पात्रता शर्तों में व्यापक सुधार की उठी आवाज

झुंझुनूं में ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच की प्रेस कॉन्फ्रेंस, भूमि व आवास संबंधी शर्तें हटाने तथा नीति को अधिक समावेशी बनाने की पैरवी

झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( ईडब्ल्यूएस ) आरक्षण की वर्तमान पात्रता शर्तों में सुधार की मांग को लेकर शनिवार को झुंझुनूं सर्किट हाउस में ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। मंच के पदाधिकारियों और समाज प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मानदंडों की समीक्षा कर उन्हें अधिक व्यावहारिक, सरल और समावेशी बनाने की मांग उठाई। मंच के प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2019 में लागू किया गया 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ऐतिहासिक कदम था, लेकिन वर्तमान पात्रता शर्तों के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक जरूरतमंद परिवार इसके लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस वर्ग की अपेक्षाकृत कम भागीदारी इस बात का संकेत है कि व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि भूमि संबंधी प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच एकड़ कृषि भूमि की सीमा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में व्यवहारिक नहीं रह गई है। खेती की बढ़ती लागत और घटती आय के बावजूद अनेक किसान परिवार केवल भूमि स्वामित्व के आधार पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी से बाहर हो जाते हैं, जिससे उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने आवास संबंधी पात्रता शर्तों को भी अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इन प्रावधानों का संयुक्त परिवार व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई परिवारों में युवा केवल पात्रता बनाए रखने के लिए अलग निवास अपनाने को मजबूर हो रहे हैं, जो सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकारों की आरक्षण नीतियों के बीच असंगति का मुद्दा भी उठाया गया। मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि कई समुदाय राज्य स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग ( ओबीसी ) में शामिल हैं, जबकि केंद्र स्तर पर सामान्य वर्ग में होने के कारण वे ईडब्ल्यूएस आरक्षण का भी पूरा लाभ नहीं ले पाते। ऐसी स्थिति में नीति में एकरूपता लाने की आवश्यकता है। मंच ने राजस्थान में पूर्व में लागू अपेक्षाकृत लचीले ईडब्ल्यूएस मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि भूमि और आवास संबंधी शर्तों में राहत देकर अधिक पात्र परिवारों को लाभान्वित किया गया था। इसी प्रकार की व्यवहारिक व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जानी चाहिए। मीडिया से बातचीत में धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि “ईडब्ल्यूएस आरक्षण का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब इसकी पात्रता शर्तें सरल, यथार्थपरक और समावेशी हों। वर्तमान व्यवस्था में किसान, महिलाएं और कई जरूरतमंद वर्ग लाभ से वंचित रह जाते हैं। केंद्र सरकार को समय रहते आवश्यक सुधार करने चाहिए।” प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच ने मांग की कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण में भूमि एवं आवास संबंधी शर्तों को समाप्त किया जाए, पात्रता मानदंडों को अधिक समावेशी बनाया जाए तथा केंद्र और राज्यों की नीतियों में समन्वय स्थापित कर सभी पात्र वर्गों को न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक पितराम काला, यशवर्धन सिंह, कर्नल शौकत अली, कैलाश लिकवा, सिंह झेरली, सुरेंद्र सिंह बडाऊ, तेजपाल सिंह टाई, सुरेंद्र सिंह डाबड़ी, रामपाल सिंह बग्गड़, प्रवीण सिंह बग्गड़, अजय सिंह बग्गड़, भवानी सिंह सुल्ताना, प्रमेन्द्र सिंह जयपाड़ी, रणजीत चंदेलिया, पूर्व सभापति खालिद हुसैन, एडवोकेट दीपेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह भाटी, सुरेंद्र सिंह नरुका, कुलदीप भाटी सहित कायमखानी समाज के अनवर नबी खान, इकबाल अली खान, शमसाद अली खान, इब्राहिम खान, उम्मेद अली खान, मास्टर सहजाद अली खान, अफजल खान एवं उदय सिंह इणडाली सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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