मंडावरा में मंच से गूंजा जल संरक्षण का संकल्प, मलसीसर-गोठड़ा में फूटा जनता का गुस्सा; दो माह से सूखी पाइपलाइन, महिलाओं ने सड़क जाम कर प्रशासन को ललकारा
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
जिले में गुरूवार को जल संरक्षण को लेकर सरकारी मंचों से बड़े-बड़े संकल्प लिए गए, पौधारोपण हुआ, जल बचाने की शपथ दिलाई गई और ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026’ के तहत जल जागरूकता के संदेश दिए गए। लेकिन दूसरी ओर जिले के कई गांवों की हकीकत इस सरकारी अभियान पर सवाल खड़े करती नजर आई, जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहीं दो माह से पेयजल आपूर्ति ठप है तो कहीं महिलाओं को सड़क पर उतरकर जाम लगाना पड़ रहा है। ऐसे में जल संरक्षण के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच की खाई साफ दिखाई दे रही है।उदयपुरवाटी पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मंडावरा में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले के प्रभारी सचिव डॉ. नवीन जैन ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए लोगों को जल बचाने की शपथ दिलाई। मंच से जल संग्रहण, भूजल पुनर्भरण और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर लंबी-चौड़ी बातें हुईं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की बात कही।लेकिन इसी जिले के मलसीसर क्षेत्र की गोखरी और भूदा का बास पंचायतों में हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीण पिछले करीब दो माह से नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं। बुगी राजगढ़ से आने वाली पाइपलाइन बंद पड़ी है और हजारों लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में ग्रामीण महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी खरीद रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच प्रशासनिक उदासीनता से परेशान ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है।
सीपीएम का हमला—‘पानी नहीं मिला तो होगा आंदोलन’
पेयजल संकट को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने उपखंड अधिकारी मलसीसर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को लेकर भी प्रशासन गंभीर नहीं है। सीपीएम तहसील सचिव महिपाल पुनिया ने आरोप लगाया कि दो माह से ग्रामीण पानी के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
गोठड़ा में फूटा महिलाओं का गुस्सा, सड़क पर लगा जाम
खेतड़ी उपखंड के गोठड़ा कस्बे में हालात और भी विस्फोटक नजर आए। वार्ड नंबर पांच और रामदेव मोहल्ले में एक सप्ताह से पानी की पर्याप्त सप्लाई नहीं होने से नाराज महिलाओं ने सड़क पर उतरकर गोठड़ा बाईपास पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं और यातायात पूरी तरह बाधित रहा।महिलाओं ने जलदाय विभाग पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि भीषण गर्मी में भी उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। कई परिवारों को एक-दो बाल्टी पानी से ही गुजारा करना पड़ रहा है। अधिकांश परिवार मजदूरी करने वाले हैं और निजी टैंकरों से पानी खरीदना उनके लिए संभव नहीं है।पुलिस और महिला पुलिसकर्मियों को मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत करनी पड़ी। समझाइश के बाद जाम खुला, लेकिन महिलाओं का आक्रोश कम नहीं हुआ। कई महिलाएं वाहनों के आगे खड़ी हो गईं और पानी की नियमित सप्लाई की मांग पर अड़ी रहीं।
चार महीने से टूटी लाइन, जिम्मेदार बेखबर
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि नानूवाली बावड़ी के पास राइजिंग लाइन पिछले करीब चार महीने से टूटी पड़ी है। ग्रामीणों द्वारा कई बार विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बावजूद लाइन की मरम्मत नहीं की गई। इसका सीधा असर गोठड़ा, नानूवाली बावड़ी, मानोता सहित कई गांवों की पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी और संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बच निकल रहे हैं, जबकि जनता लगातार संकट झेल रही है।
‘20 लाख लीटर का वादा, मिल रहा केवल 4-5 लाख लीटर’
गोठड़ा पंचायत प्रतिनिधियों ने भी जलदाय विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गांव को प्रतिदिन 20 लाख लीटर पानी उपलब्ध कराने का समझौता हुआ था, लेकिन वास्तविकता में केवल 4 से 5 लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में पानी का वितरण चरमरा गया है और लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
सरकारी संकल्प बनाम जमीनी सच्चाई
विडंबना यह है कि जिस दिन जिले में जल संरक्षण को लेकर बड़े आयोजन किए जा रहे थे, उसी दिन जिले के कई गांवों में लोग पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे। मंचों पर जल बचाने की शपथ दिलाई जा रही थी, जबकि गांवों में महिलाएं पानी के लिए सड़कें जाम करने को मजबूर थीं। सवाल यह है कि जब मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था ही चरमराई हुई है, पाइपलाइनें महीनों से टूटी पड़ी हैं और हजारों लोग पेयजल संकट झेल रहे हैं, तब केवल संकल्प, भाषण और अभियान क्या इस संकट का समाधान कर पाएंगे? जनता अब घोषणाओं से अधिक धरातल पर परिणाम चाहती है। यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में यह जल संकट प्रशासन के लिए बड़ा जनआक्रोश बन सकता है।










