अभिमान त्याग कर ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है — पंडित तिवाड़ी

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ध्रुव वरदान की सजीव झाकी रही आकर्षण का केन्द्र

चिड़ावा I भझुंझुनूं I अजीत जांगिड़
क्ति स्व भंजन का नाम है। जब मनुष्य अपनेपन का भाव त्याग कर अपने इष्ट को ही सब कुछ समझने लगता है। यानी स्व का अभिमान पूर्ण रूप से दूर कर देता है। तब वह भक्त बन जाता है और उसे ही ईश्वर की प्राप्ति होती है। उक्त विवेचना दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से विभूषित वाणीभूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने सेही कलां के नेत दादा मंदिर परिसर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन ध्रुव प्रसंग की व्याख्या करते हुए कही। तिवाड़ी ने बताया कि ध्रुव ने स्वयं को भगवान के चरणों मे समर्पित कर दिया तो भगवान प्रसन्न होकर प्रगट हो गए। कथा में भगवान कपिल के आध्यात्मिक प्रसंग की बड़ी सुंदर वैज्ञानिक व्याख्या की गई। शिव सती चरित्र सृष्टि वर्णन सहित अनेक सुंदर कथा भी सुनाई गई। कथा से पूर्व डॉ. जगदीशप्रसाद शर्मा को पंडित बालकिशन चौरासिया ने सपत्निक वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत पुराण एवं व्यास पूजन करवाया। कथा में ध्रुव वरदान की सजीव झाकी सजाई गई। भक्तिमय संगीत से आनंद की वर्षा हुई। कथा में हजारीलाल शर्मा, अशोक शर्मा, ओमप्रकाश महरिया, विक्रम शर्मा, करणसिंह शेखावत, राकेश पूनियां, राजेंद्रसिंह शेखावत, मातूराम महरिया, संजय भगत, नत्थुराम शर्मा, जितेंद्र जांगिड़, ब्रह्मानंद पूनियां, सत्यनारायण कुमावत, प्रमोद भगत, होशियारीलाल शर्मा, गजाननंद शर्मा, अनिल शर्मा, धरमसिंह शेखावत, रवि कुमावत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरूष मौजूद रहे।