विप्र समाज की एकजुट हुंकार: बसावतिया को सौंपें विप्र कल्याण बोर्ड की कमान

राजस्थान पुजारी महासंघ ने तेज की मुहिम, मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखी जाएगी मांग; प्रदेशभर से मिल रहा समर्थन

झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
राजस्थान में विप्र समाज की आवाज को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग अब मुखर होती जा रही है। राजस्थान पुजारी महासंघ ने विप्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर महेश बसावतिया की नियुक्ति की जोरदार पैरवी करते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि समाज के हितों की सशक्त पैरवी और ब्राह्मण वर्ग से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बसावतिया जैसे अनुभवी एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता को बोर्ड की कमान सौंपना समय की आवश्यकता है।महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल न केवल बसावतिया की नियुक्ति का मुद्दा उठाएगा, बल्कि विप्र समाज से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित करेगा I महासंघ के अनुसार, महेश बसावतिया ने वर्षों से सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए समाज के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने समाज को संगठित करने, युवाओं को जोड़ने तथा विभिन्न मंचों पर विप्र समाज की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यही कारण है कि प्रदेशभर के ब्राह्मण समाज में उनके नाम को लेकर व्यापक सहमति और समर्थन का माहौल बनता जा रहा है।

प्रदेशभर में समर्थन की लहर, जनसंपर्क अभियान हुआ तेज

महासंघ के पदाधिकारियों ने दावा किया कि राज्य के अनेक जिलों से बसावतिया के समर्थन में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। समाज के विभिन्न संगठनों और प्रबुद्धजनों ने भी उनकी नियुक्ति को लेकर समर्थन व्यक्त किया है। इसी क्रम में महासंघ ने प्रदेशव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू किया है, ताकि समाज की भावनाओं और अपेक्षाओं को सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जा सके।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन के संकेत

महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने समाज की भावना के अनुरूप निर्णय नहीं लिया, तो आगामी दिनों में आंदोलन की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि संगठन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार विप्र समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी। विप्र समाज के लोगों का मानना है कि विप्र कल्याण बोर्ड को प्रभावी और सक्रिय नेतृत्व मिलने से समाज के विकास, कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार तथा विभिन्न समस्याओं के समाधान को नई गति मिलेगी। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।