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शेखावाटी को जल्द मिलेगा यमुना जल, 32 हजार करोड़ स्वीकृत : प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत

मरोदिया तालाब पर उमड़ा जनसैलाब, जल संरक्षण का लिया संकल्प

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिले में संचालित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत मंगलवार को अलसीसर स्थित मरोदिया तालाब पर विशाल जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और जनभागीदारी को समर्पित इस आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं ग्रामीणों ने भाग लेकर जल बचाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत रहे, जबकि अध्यक्षता निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुल्हरी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक कलश यात्रा से हुई। इसके बाद पीपल पूजन, सरोवर पूजन एवं श्रमदान जैसे आयोजनों के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया गया। वहीं “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि शेखावाटी क्षेत्र को यमुना जल उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार के साथ एमओयू किया जा चुका है तथा योजना के लिए लगभग 32 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना पूरी होने पर सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों को पेयजल आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के अंतर्गत 19 विभागों द्वारा समन्वित रूप से कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के तहत वर्षा ऋतु से पूर्व पौधारोपण, प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई, जल संरक्षण गतिविधियां एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आमजन से घरों में कुंड बनाकर वर्षा जल संरक्षण करने तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।अध्यक्षता कर रहीं निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुल्हरी ने कहा कि “जल है तो जीवन है, जल है तो कल है।” उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से पानी की हर बूंद का महत्व समझने और वर्षा जल संरक्षण को अपनाने का आह्वान किया। पूर्व सांसद नरेंद्र खीचड़ ने कहा कि हमारे पूर्वज पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों के माध्यम से जल का बेहतर प्रबंधन करते थे। आज आवश्यकता है कि उन परंपराओं को आधुनिक जीवन में पुनः अपनाया जाए, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके। मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुरूषोत्तम धानका ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य आमजन की भागीदारी बढ़ाना और जल संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय सहभागिता के बिना प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी संरक्षण संभव नहीं है।कार्यक्रम के अंत में वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को पौधे वितरित किए गए तथा सभी उपस्थित लोगों ने जल संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर पूर्व सांसद नरेंद्र खीचड़, अतिरिक्त जिला कलेक्टर अजय कुमार आर्य, सीईओ पुरूषोत्तम धानका, मलसीसर एसडीएम सुमन चौधरी, एसीईओ रामनिवास चौधरी, बीडीओ अलसीसर ममता चौधरी, बीडीओ मंडावा अमित चौधरी, इंजी. प्यारेलाल ढूकिया , पर्यटन विभाग के उपनिदेशक देवेंद्र चौधरी, जिला कोषाधिकारी डॉ. सतीश खेदड़, जिला रसद अधिकारी डॉ. निकिता राठौड़, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अभिषेक चौपदार, एवीवीएनएल के अधीक्षण अभियंता एम.के. टिबड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक राजेश मील, समग्र शिक्षा के सहायक निदेशक अशोक जांगिड़, स्काउट एंड गाइड सीओ महेश कालावत, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन पूनिया, अधीक्षण अभियंता वाटरशेड मनोज गौड़, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र लांबा, उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. विजयपाल कस्वा, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अरविंद लामोरिया, पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता राजपाल सिंह, अभियान के जिला संयोजक राकेश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे

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