प्रतिभाओं का महाकुंभ

जिला कलक्टर ने की सराहना, कहा—ग्रामीण अंचल से निकल रही हैं नई ऊंचाइयों की प्रतिभाएं

हेतमसर । झुंझुनूं।अजीत जांगिड़

शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक समृद्धि का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब शेखावाटी पब्लिक स्कूल (आईआईटी गुरुकुल द्वारा संचालित), हेतमसर का वार्षिकोत्सव भव्य और गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जिला कलक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और आधुनिक आधारभूत संरचना की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण प्रतिभाएं अब सीमाओं को तोड़कर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।समारोह की अध्यक्षता विद्यालय चेयरमैन संतोष मित्तल, अध्यक्ष शैलेश सैदावत एवं प्रबंध निदेशक भेरूलाल गुर्जर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. छोटेलाल गुर्जर, सहायक प्रोफेसर धीर सिंह धाबाई तथा अतिरिक्त जिला अधिकारी प्रियंका लांबा की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।विद्यालय, जो कि आईआईटी गुरुकुल द्वारा संचालित एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है और जिसका मुख्यालय सूरत (गुजरात) में स्थित है, आज सात राज्यों में अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का परचम लहरा रहा है। जेईई, नीट और ओलंपियाड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में इसके शानदार परिणाम इसे विशेष पहचान दिलाते हैं।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक राजस्थानी आतिथ्य से हुई, जहां अतिथियों का अपर्णा ओढ़ाकर स्वागत किया गया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उन्हें जीवित लिली पौधे भेंट किए गए।अपने संबोधन में अध्यक्ष श्री शैलेश सैदावत ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर देते हुए अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।समारोह में सत्र 2025–26 के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को जिला कलक्टर द्वारा सम्मानित किया गया, जिससे छात्रों में उत्साह और प्रेरणा का संचार हुआ। इसके बाद देशभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों से ओतप्रोत रंगारंग प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया और पूरा वातावरण तालियों की गूंज से सराबोर हो उठा।कार्यक्रम के अंत में प्रबंध निदेशक भेरूलाल गुर्जर ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय की निरंतर प्रगति के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा जताई। शिक्षा, संस्कृति और संस्कार का संगम बना यह आयोजन, क्षेत्र में नई शैक्षणिक ऊर्जा का संदेश देकर गया।