40 साल पुराना रोजगार उजड़ा, ठेला संचालकों का फूटा गुस्सा

झुंझुनूं के गांधी चौक से हटाए जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, बोले- वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो होगा आंदोलन

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
गांधी चौक क्षेत्र में यातायात पुलिस द्वारा ठेले और रेहड़ियां हटाने की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को शहर के रेहड़ी-ठेला संचालकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। वर्षों से गांधी चौक में छोटे कारोबार से परिवार चलाने वाले दर्जनों ठेला संचालक एकजुट होकर जिला कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे तथा प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कई दुकानदार भावुक हो गए और अपनी रोजी-रोटी छिनने का दर्द बयां किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से गांधी चौक क्षेत्र में सड़क किनारे नाले के ऊपर बैठकर छोटा-मोटा व्यापार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वे कभी भी मुख्य सड़क पर अतिक्रमण नहीं करते थे और यातायात बाधित किए बिना व्यवस्थित तरीके से अपना काम करते थे। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना और बिना वैकल्पिक स्थान दिए अचानक उन्हें हटा दिया। रेहड़ी-ठेला संचालकों ने कहा कि इस कार्रवाई से उनके सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। कई दुकानदारों ने कहा कि उनके घर का पूरा खर्च इसी छोटे कारोबार पर निर्भर है और अब बच्चों की पढ़ाई तथा परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन के दौरान ठेला संचालक सत्यनारायण स्वामी ने प्रशासन की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए कहा कि वे वर्षों से नियमों के अनुसार सड़क किनारे कारोबार कर रहे थे। समोसे की रेहड़ी लगाने वाले सत्यनारायण ने कहा कि उनके परिवार में 12 सदस्य हैं और अब समझ नहीं आ रहा कि घर कैसे चलेगा। इस मुद्दे पर सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन देना शुरू कर दिया है। युवा संगठन डीवाईएफआई के जिला महासचिव योगेश कटारिया भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और रेहड़ी-ठेला संचालकों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गरीब दुकानदारों को न्याय मिलना चाहिए तथा उन्हें पुनः उसी स्थान पर कारोबार करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान चीरा सिंह, संजय पारीक, श्योराम कुमावत, भूर सिंह, जाकिर अली, सोनू कुमावत, मिठू राम कुमावत, सत्यनारायण स्वामी, विकास स्वामी, जगदीश प्रसाद, नितिन, चंद्रभान, भरत, गंगाराम और बाबूलाल सहित बड़ी संख्या में रेहड़ी-ठेला संचालक मौजूद रहे।