दूल्‍हे प्रखर लाम्बा ने पेश की मिसाल, ना दहेज लिया और ना ही लिए सोने-चांदी के आभूषण

सुलताना ।झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
कस्बे में दूल्‍हे ने बिना दहेज शादी कर समाज के लिए एक मिसाल प्रस्‍तुत की है। ससुराल पक्ष से केवल एक रुपया और नारियल लेकर दुल्‍हन को विदा कराकर घर लाया। दूल्‍हे की इस फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है। दुल्हे प्रखर लाम्बा ने गत 11 मार्च को सुलताना गांव के सुनील लाम्बा सुलताना के पुत्र व लीलाधर दहिया की बेटी ऋतिका के साथ रचाए विवाह में शुगन के तौर पर एक रुपया और नारियल लेकर एक मिसाल कायम की है। दरअसल, सुलताना गांव के सुनील लाम्बा सुलताना के पुत्र प्रखर लाम्बा शुरु से ही लड़कियों को उच्च शिक्षा देने का हिमायती रहा है। साथ ही दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या और नशे जैसी बुराइयों का कड़ा विरोधी रहा। जब उसके रिश्ते की बात कंकड़ेऊ खुर्द निवासी लीलाधर दहिया हाल निवासी झुंझुनूं की पुत्री ऋतिका के साथ चली तो उसने पहले ही दहेज न लेने की बात स्पष्ट कर दी। दूल्हे डीआरएक्स प्रखर लाम्बा ने कहा कि एक उच्च शिक्षित व गुणवान युवती से उसका विवाह होना ही उसके लिए सबसे बड़ा दहेज होगा। प्रखर लाम्बा की इस बात से उसके पिता सुनील लाम्बा सुलताना भी राजी थे। दामाद की दृढ़ इच्छा को भांपते हुए लीलाधर दहिया भी बगैर दहेज शादी के लिए राजी हो गए। झुंझुनूं के सनसाईन होटल में सादगी से संपन्न हुए प्रखर लाम्बा व ऋतिका के विवाह समारोह में नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए बड़ी संख्या में समाज के लोग भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रखर लाम्बा द्वारा बगैर दहेज शादी समाज के लिए गर्व की बात होने के अलावा एक मिसाल बन गई है। समाज में इस तरह की शादियां होना अच्छी पहल है। समस्त गांव सुलताना ने भी प्रखर लाम्बा की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि समाज का हर शख्स ऐसे निर्णय लेने लग जाएं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और किसी भी बाप को अपनी बेटियां बोझ नहीं लगेगी।

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