झुंझुनूं पंचायत समिति में सरपंच पदों की तस्वीर साफ —18 सीटें सामान्य, 6 ओबीसी, 6 एससी, एक एसटी और एक अनारक्षित महिला के लिए , अब गांवों में टिकट और चेहरे पर मंथन तेज
झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
नगरीय निकाय चुनावों के बाद अब झुंझुनूं की राजनीति का फोकस गांवों की ओर मुड़ गया है। पंचायत समिति झुंझुनूं के अंतर्गत आने वाली 32 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी पूरी होने के साथ ही गांवों की चुनावी राजनीति का प्रारंभिक खाका साफ हो गया है। आरक्षण की श्रेणी तय होते ही लंबे समय से तैयारी कर रहे संभावित दावेदारों के समीकरण बदल गए हैं और राजनीतिक दलों के सामने भी अब उपयुक्त चेहरों की तलाश का दौर शुरू हो गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर आरक्षण की प्रक्रिया 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर निर्धारित कार्यक्रम के तहत हुई।
18 सीटें सामान्य, लेकिन आधी से अधिक सीटों पर आरक्षण की छाप
लॉटरी से सामने आई सूची के अनुसार पंचायत समिति झुंझुनूं की 32 ग्राम पंचायतों में 18 सरपंच पद सामान्य वर्ग के लिए हैं। इनमें 10 सामान्य वर्ग की सीटें खुली हैं, जबकि 8 सामान्य महिला के लिए आरक्षित हैं। वहीं 6 सीटें ओबीसी वर्ग के लिए निर्धारित हुई हैं, जिनमें 3 ओबीसी महिला और 3 ओबीसी सामान्य हैं। इसी तरह 6 सीटें अनुसूचित जाति के लिए हैं—इनमें 3 एससी महिला और 3 एससी सामान्य हैं। इसके अलावा एक सीट अनुसूचित जनजाति महिला तथा एक सीट अनारक्षित महिला के लिए निर्धारित हुई है। इस तरह 32 में से 16 सरपंच पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं। आरक्षण ने साफ कर दिया है कि इस बार गांवों की चुनावी राजनीति में महिला दावेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।
इन ग्राम पंचायतों में खुला चुनावी रास्ता
लॉटरी के अनुसार — अनारक्षित महिला – आबूसर , ओबीसी – अजाड़ी कलां, बिशनपुरा, पकोड़ी की ढाणी , सामान्य – बाकरा, बास नानग , बीबासर, बुड़ाना, लालपुर, माखर, पातुसरी, प्रतापपुरा, पुरोहितों की ढाणी, उदावास , सामान्य महिला – भंड़ोदा कलां, भंड़ोदा खुर्द, इण्डाली, इस्लामपुर, काली पहाड़ी, खाजपुर नया, कुलोद कलां, नयासर , एससी महिला – चिचड़ोली , दोरादास, मालसर , एससी – देरवाला, कासिमपुरा, शिशियां , ओबीसी महिला – दोरासर, जयपहाड़ी, कायस्थपुरा , एसटी महिला – खतेहपुरा कुलोठ खुर्द शामिल हैं ।
आरक्षण के साथ बदली ‘दावेदारी की दिशा’
आरक्षण की घोषणा के साथ ही गांवों में चुनावी चर्चा का केंद्र भी बदल गया है। जिन संभावित प्रत्याशियों ने महीनों से सामान्य सीट को ध्यान में रखकर तैयारी की थी, उनमें से कई को अब अपने समीकरण नए सिरे से बनाने होंगे। वहीं महिला, ओबीसी, एससी और एसटी आरक्षित सीटों पर नए चेहरों के सामने आने की संभावना है। खास बात यह है कि आरक्षण केवल उम्मीदवार की श्रेणी तय नहीं करता, बल्कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों और प्रभावशाली समूहों की रणनीति को भी प्रभावित करता है। अब प्रमुख दलों के सामने दोहरी चुनौती होगी—एक तरफ आरक्षित वर्ग में मजबूत सामाजिक पकड़ रखने वाले चेहरे तलाशना और दूसरी तरफ स्थानीय गुटों व समर्थक समूहों के बीच संतुलन बनाना।
निकाय चुनाव के बाद गांवों में पहुंचेगी सियासी गर्मी
झुंझुनूं में हाल ही में नगर निकाय चुनावों के बाद अब पंचायत चुनाव की बारी है। जिला स्तर पर 23 सितंबर को 14 पंचायत समितियों के प्रधान, 248 पंचायत समिति सदस्य वार्ड और 41 जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण तय किया जा चुका है। इसके बाद 24 सितंबर को ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच-पंचों के आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
अब ग्राम पंचायतों में ‘कौन लड़ेगा’, ‘किसके पास जनाधार है’ और ‘किस आरक्षित वर्ग से कौन-सा चेहरा मैदान में उतरेगा’ जैसे सवालों पर चर्चाएं तेज होना तय है। पंचायत समिति झुंझुनूं की 32 ग्राम पंचायतों में आरक्षण की तस्वीर साफ होने के साथ ही ग्रामीण राजनीति में चुनावी बिसात बिछने लगी है।
एक नजर में आरक्षण का गणित
ग्राम पंचायतें – सामान्य 10 , सामान्य महिला 8 , ओबीसी 3 , ओबीसी महिला 3 , एससी 3 , एससी महिला 3 , एसटी महिला 1 , अनारक्षित महिला 1 इस तरह कुल 32 सीटें शामिल है ।
राजनीतिक संकेत
अब आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद अगला चरण दावेदारों की सक्रियता, राजनीतिक दलों की अंदरूनी कवायद और गांव-गांव सामाजिक समीकरणों के पुनर्गठन का होगा। हालांकि किस दल या प्रत्याशी को इसका लाभ मिलेगा, यह चुनावी मैदान में उम्मीदवारों, स्थानीय गठजोड़ और मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।














