पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई धोक राजस्थान के साथ हरियाणा – यूपी तक से पहुंचते हैं श्रद्धालु, पांच दिन तक चलेगा मेला
खेतड़ी।झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शुमार गाडराटा के ऐतिहासिक बाबा सुंदरदास महाराज के लक्खी मेले का मंगलवार को श्रद्धा और आस्था के बीच शुभारंभ हुआ। मंदिर में जोत अर्पित किए जाने के साथ ही मेले की शुरूआत हुई। पहले ही दिन हजारों श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचे और धोक लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की। मेले में राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
करीब 500 साल पुरानी आस्था, मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता
बाबा सुंदरदास महाराज के भगत महिपाल सिंह ने बताया कि बाबा सुंदरदास के मंदिर से लोगों की आस्था करीब पांच सौ वर्षों से जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं में बाबा के दरबार को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से की गई मनोकामना पूर्ण होती है। विशेष रूप से सर्पदंश और पशुओं को होने वाली बीमारियों से रक्षा के लिए श्रद्धालु बाबा के मंदिर में धोक लगाने पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बाबा के प्रति आस्था की परंपरा आज भी कायम है। घर में पशु के बच्चा देने के बाद पहला दूध और दही मंदिर में चढ़ाने की परंपरा है। इसके साथ ही पशुओं को बांधने वाली बेल (साकल) अथवा रस्सा भी मंदिर में लाकर श्रद्धालु बाबा के दरबार में धोक लगाते हैं।
उन्होंने बताया कि यह मेला भाद्रपद की एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों तक आयोजित होता है। मेले में श्रद्धालु विशेष रूप से जात-जड़ूले उतरवाने तथा बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। पहले तीन दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रहती है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बन जाता है। मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुंदरदास सेवा समिति और प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। समिति की ओर से मेले से पहले साफ-सफाई करवाई गई तथा दुकानों के लिए स्थान आवंटित कर दिया गया है।
दुकानदारों को 8 फीट जगह दी गई है, जबकि सड़क के दोनों ओर करीब 20 फीट चौड़ा रास्ता आवागमन के लिए रखा गया है। मेले की व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए करीब 100 वालंटियर तैनात किए गए हैं। मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए बाउंसर लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग की गई है। मेले की सुरक्षा और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा कंट्रोल रूम स्थापित कर पूरे मेले की मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके अलावा मेले पर ड्रोन से भी निगरानी रखी जाएगी। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण वन विभाग से सर्च लाइट भी मंगवाई गई है, जिसके माध्यम से रात के समय आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों पर नजर रखी जाएगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यातायात और पार्किंग की अलग व्यवस्था की गई है। मेला समिति की ओर से पेयजल के लिए पानी के टैंकर लगाए गए हैं। साफ-सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए कचरा गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की ओर से सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वहीं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल स्टाफ के साथ दो एंबुलेंस भी मेले में तैनात की गई हैं।













