IEP, प्रभावी संचार और अभिभावक-शिक्षक सहभागिता पर विशेषज्ञों ने साझा किए उपयोगी सुझाव
हनुमानगढ़। नवज्योति विकलांग कल्याण एवं पुनर्वास संस्थान के तत्वावधान में आयोजित जोनल स्तरीय Continuing Rehabilitation Education (CRE) कार्यक्रम के द्वितीय दिवस का आयोजन उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों के समावेशी विकास, प्रभावी शिक्षा, पुनर्वास सेवाओं तथा संबंधित पेशेवरों के निरंतर व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के श्री विक्रम सिंह रहे। उन्होंने RCI प्रमाण-पत्र के सत्यापन एवं वैधता तथा पुनर्वास क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के निरंतर ज्ञानवर्धन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के साथ कार्य करने वाले पेशेवरों को समयानुकूल अपने ज्ञान एवं कौशल को विकसित करते रहना चाहिए।
संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ. पायल गुम्बर ने IEP (Individualized Education Programme) के माध्यम से समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमताएं, आवश्यकताएं और सीखने की गति अलग होती है, इसलिए उसकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप शैक्षिक लक्ष्य निर्धारित किए जाने चाहिए। संस्थान के सचिव भीष्म कौशिक ने दिव्यांगजनों की क्षमताओं और संभावनाओं को पहचानते हुए उन्हें उचित अवसर एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
संसाधन व्यक्ति डॉ. विजय भारती ने श्रवण बाधित बच्चों के लिए प्रभावी संचार एवं IEP की उपयोगिता पर जानकारी दी। उन्होंने बच्चे, शिक्षक, माता-पिता, विशेष शिक्षक और अन्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि IEP के लक्ष्य कार्यात्मक, मापनीय एवं बाल-केंद्रित होने चाहिए तथा नियमित मूल्यांकन के आधार पर इसमें आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए।
श्री मोहम्मद नसीम ने समावेशन एवं सहभागिता के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वास्तविक समावेशन का उद्देश्य बाधाओं को दूर कर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार योगदान एवं नेतृत्व का अवसर देना है।
सुश्री पूजा सिंह ने IEP के निर्माण एवं क्रियान्वयन में माता-पिता और शिक्षकों की साझेदारी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अभिभावक बच्चे की व्यक्तिगत एवं पारिवारिक परिस्थितियों की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं, जबकि शिक्षक एवं विशेष शिक्षक लक्ष्य निर्धारण, शिक्षण रणनीति, पाठ्यक्रम अनुकूलन और प्रगति की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सहायक प्राध्यापक रिंकू कुमार ने IEP के व्यवहारात्मक घटकों पर जानकारी देते हुए Functional Behavior Assessment, सकारात्मक पुनर्बलन, Replacement Behaviors, Data Monitoring और Team Collaboration की भूमिका समझाई। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित व्यवहारात्मक हस्तक्षेप से बच्चों में आत्म-नियंत्रण, सामाजिक कौशल और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर संवाद किया। समापन पर आयोजकों ने मुख्य अतिथि, संसाधन व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में समावेशी शिक्षा, प्रभावी संचार, अभिभावक सहभागिता और टीमवर्क के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
















