झुंझुनूं में भाजपा के मनु धनखड़ बनाम कांग्रेस के अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान, कई निकायों में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार; 17 को जांच, 18 को नाम वापसी के बाद साफ होगी तस्वीर
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
नगर निकाय चुनाव में पार्षदों की तस्वीर साफ होने के बाद अब नजरें अध्यक्ष की कुर्सी पर टिक गई हैं। जिले की 19 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन बुधवार को कुल 52 अभ्यर्थियों ने पर्चे दाखिल कर राजनीतिक मुकाबले को रोचक बना दिया। खास बात यह है कि कई निकायों में भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय दावेदारों ने भी ताल ठोकी है। ऐसे में नामांकन वापसी के बाद कई जगह मुकाबला सीधे दो दलों के बीच रहने के बजाय बहुकोणीय हो सकता है।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर डॉ. अरूण गर्ग के अनुसार नगर परिषद झुंझुनूं में 2, पिलानी में 4, सूरजगढ़ में 3, जाखल में 2, नवलगढ़ में 2, मलसीसर में 2, बिसाऊ में 2, उदयपुरवाटी में 3, सुलताना में 2, बुहाना में 4, खेतड़ी में 1, सिंघाना में 2, डूंडलोद में 2, मंड्रेला में 5, विद्याविहार में 4, बगड़ में 2, मुकुंदगढ़ में 4, मंडावा में 2 तथा चिड़ावा में 5 अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किए हैं।
झुंझुनूं में भाजपा से मनु धनखड़ और काग्रेस से अब्दुल्ला आमने-सामने
जिला मुख्यालय की नगर परिषद में सभापति पद की दौड़ फिलहाल मनु धनखड़ (भाजपा) और अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान (कांग्रेस/निर्दलीय) के बीच दिखाई दे रही है। 60 वार्डों वाली नगर परिषद में पार्षदों के चुनाव परिणामों में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, जबकि भाजपा और निर्दलीयों की संख्या भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में अध्यक्ष चुनाव में दल के आंकड़ों के साथ निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। अब असली राजनीतिक परीक्षा यह होगी कि अध्यक्ष पद के दावेदार अपने पक्ष में पार्षदों का समर्थन किस तरह जुटाते हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद ही स्पष्ट होगी।
मंड्रेला और चिड़ावा में सबसे ज्यादा दावेदार
अध्यक्ष पद के लिए मंड्रेला और चिड़ावा में पांच-पांच प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। मंड्रेला में प्रवीण (कांग्रेस/निर्दलीय), नफिसा बानो (निर्दलीय), उर्मिला कंवर (भाजपा/निर्दलीय), रतनी देवी (भाजपा/निर्दलीय) और पिंकी कंवर (भाजपा/निर्दलीय) मैदान में हैं। वहीं चिड़ावा में परीक्षा ब्याडवाल, महेन्द्र कुमार चेजारा और शिशराम सैनी निर्दलीय के रूप में, जबकि सुमित्रा सैनी कांग्रेस तथा सुरेश कुमार भाजपा से प्रत्याशी हैं। यहां भी नाम वापसी के बाद मुकाबले की दिशा बदल सकती है।
बुहाना, पिलानी, विद्याविहार और मुकुंदगढ़ में भी दिलचस्प मुकाबला
पिलानी में अदिति, धर्मेन्द्र नेहरा और सुनील निर्दलीय तथा नरेन्द्र कुमार भाजपा से मैदान में हैं। बुहाना में मंजू बाला, इंदू और सुनील कुमार भाजपा से, जबकि सुधीर रांगेय कांग्रेस/निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर चुके हैं। विद्याविहार में प्रदीप कुमार झाझड़िया और नवीन कुमार ठोलिया निर्दलीय, सिकन्दर भाजपा तथा सरोज कुमारी भाजपा/निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं। मुकुंदगढ़ में संजू भाजपा/निर्दलीय, दलीप कुमार मीणा निर्दलीय, सत्यनारायण सैनी कांग्रेस और अजय भाजपा से प्रत्याशी हैं।
कहां किसके बीच मुकाबला
सूरजगढ़: रूक्मानन्द सैनी (भाजपा), पुष्पा देवी गुप्ता (निर्दलीय), नरेन्द्र सिंह (निर्दलीय)
जाखल: निर्मली देवी (कांग्रेस), भगवान सिंह (भाजपा)
नवलगढ़: उषा देवी (भाजपा), माया देवी (कांग्रेस)
मलसीसर: पवन कुमार (भाजपा), प्रवीण (कांग्रेस)
बिसाऊ: सोनम देवी (भाजपा), सलमा (कांग्रेस)
उदयपुरवाटी: अनुराधा (भाजपा), रूड़मल (कांग्रेस), शिशपाल (कांग्रेस/निर्दलीय)
सुलताना: पूजा शर्मा (भाजपा), सोनिया/मोसिम (कांग्रेस)
खेतड़ी: गीता देवी (भाजपा)
सिंघाना: रानू देवी (भाजपा/निर्दलीय), पिंकी (कांग्रेस)
डूंडलोद: सचिन सैनी (भाजपा), मनफूल सिंह पुनियां (कांग्रेस)
बगड़: राकेश कुमार शर्मा (कांग्रेस), गोविन्द सिंह राठौड़ (भाजपा)
मंडावा: सज्जन लाल मिश्रा (कांग्रेस), विजेन्द्र सैनी (भाजपा)
अब 17 सितंबर को होगी नामांकन पत्रों की जांच
नामांकन दाखिल होने के साथ ही अब चुनाव प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। इसके बाद 18 सितंबर को अपराह्न 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। नाम वापसी के बाद ही प्रत्याशियों की अंतिम सूची और चुनाव चिन्हों की तस्वीर साफ होगी। अध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही मतगणना की जाएगी।
राजनीतिक रूप से अहम होगा 18 सितंबर का दिन
अध्यक्ष पद के इस चुनाव में 18 सितंबर की नाम वापसी की तारीख सबसे अहम पड़ाव मानी जा रही है। कई निकायों में एक से अधिक दावेदार होने के कारण यदि प्रत्याशी मैदान में बने रहते हैं तो मुकाबला बहुकोणीय होगा, जबकि नाम वापसी के बाद कुछ स्थानों पर तस्वीर सीधे आमने-सामने की लड़ाई में बदल सकती है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कौन मैदान में कायम रहता है, कौन नाम वापस लेता है और किस प्रत्याशी के पीछे पार्षदों का समर्थन खड़ा होता है। 21 सितंबर को होने वाला अध्यक्ष पद का मतदान इन स्थानीय निकाय चुनावों की राजनीतिक तस्वीर को अंतिम रूप देगा।














