27 अगस्त से नामांकन, 9 व 11 सितंबर को मतदान और 14 सितंबर को मतगणना; 21 सितंबर को निकाय प्रमुख, 22 को उपाध्यक्ष का चुनाव, आचार संहिता लागू होते ही नई घोषणाओं, उद्घाटन-शिलान्यास और नए कार्यादेश पर लगी रोक; अब वार्डों में तेज होगा टिकटों का सियासी गणित
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झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही झुंझुनूं जिले में भी सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिले की एक नगरपरिषद और 18 नगरपालिकाओं सहित कुल 19 शहरी निकायों में 555 पार्षद पदों के लिए चुनाव होंगे। चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही सभी 19 निकायों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ने लगी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के अनुसार निकाय चुनाव के लिए 27 अगस्त से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 31 अगस्त रहेगी। जिले में पहले चरण का मतदान 9 सितंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होगा। मतगणना 14 सितंबर को होगी। निकाय प्रमुख का चुनाव 21 सितंबर तथा उपाध्यक्ष का चुनाव 22 सितंबर को कराया जाएगा। पहले चरण में जिले की 10 नगरपालिकाओं में मतदान होगा। इनमें पिलानी, चिड़ावा, मंड्रेला, विद्याविहार पिलानी, सूरजगढ़, बुहाना, सिंघाना, मंडावा, बिसाऊ और मलसीसर शामिल हैं। इन निकायों में कुल 280 पार्षद पदों के लिए जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी।वहीं दूसरे चरण में 11 सितंबर को नगरपरिषद झुंझुनूं सहित 9 निकायों में मतदान होगा। इनमें झुंझुनूं, बगड़, सुलताना, नवलगढ़, जाखल, मुकुंदगढ़, डूंडलोद, खेतड़ी और उदयपुरवाटी शामिल हैं। दूसरे चरण में कुल 275 पार्षद पदों के लिए चुनाव होगा। खास बात यह है कि झुंझुनूं नगरपरिषद सभापति की सीट अनारक्षित (ओपन) रखी गई है, जिससे यहां चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक होने के आसार हैं।
टिकटों को लेकर शुरू होगा सियासी मंथन
चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत प्रत्याशियों के चयन की होगी। वार्ड स्तर पर जातीय समीकरण, स्थानीय प्रभाव, पिछले चुनावों का प्रदर्शन, पार्टी संगठन में सक्रियता और जीत की संभावना टिकट वितरण के प्रमुख आधार बन सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों में दावेदारों की दौड़ तेज होने की संभावना है। कई वार्डों में संभावित प्रत्याशी पहले से ही जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दे भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। सड़क, पेयजल, सफाई, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, पार्क और शहरों के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रत्याशी जनता के बीच पहुंचेंगे। वहीं राजनीतिक दल राज्य सरकार की उपलब्धियों और स्थानीय स्तर पर अपने कामकाज को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में जुट सकते हैं।
पहली बार एक साथ सभी नगरीय निकायों में चुनाव
राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में पहली बार सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव कराने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार ने ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’ की अवधारणा की तर्ज पर नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की घोषणा की थी। ऐसे में इन चुनावों को स्थानीय राजनीति के साथ-साथ प्रदेश की राजनीतिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आचार संहिता से विकास कार्यों पर भी ब्रेक
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू होने से शहरी क्षेत्रों में नई विकास योजनाओं की घोषणा पर रोक लग गई है। नए कार्यों की घोषणा और नए वर्क ऑर्डर जारी नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि, पहले से स्वीकृत और चल रहे कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी रह सकेंगे। नए कार्यों का शुभारंभ नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा चुनाव के दौरान नई सरकारी घोषणाओं, उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों पर भी रोक रहेगी। मंत्री और नेता सरकारी वाहनों का उपयोग कर निकाय क्षेत्रों में चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। चुनाव प्रचार के लिए जाने वाले मंत्रियों के सरकारी गेस्ट हाउस में ठहरने पर भी रोक रहेगी।
अब वार्डों में दिखेगा असली चुनावी रंग
चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही झुंझुनूं जिले की नगरीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब तक पर्दे के पीछे चल रही टिकट की जोड़-तोड़, वार्डों के समीकरण और संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक सक्रियता खुलकर सामने आने लगेगी। 27 अगस्त से नामांकन शुरू होने के साथ चुनावी तस्वीर और साफ होगी। 9 और 11 सितंबर को जनता के फैसले के बाद 14 सितंबर को परिणाम सामने आएंगे और इसके बाद निकाय प्रमुख तथा उपाध्यक्ष के चुनाव के साथ स्थानीय सत्ता का नया समीकरण तय होगा। झुंझुनूं की 19 शहरी निकायों में 555 पार्षद पदों पर होने वाला यह चुनाव अब शहरों की सरकार चुनने के साथ-साथ जिले के बदलते राजनीतिक समीकरणों की भी परीक्षा बनेगा।















