दुबई में छिपे आरोपियों को भारत लाने की मांग, धरने में झुंझुनूं के चार कथित सहयोगियों की तस्वीरें भी लगाईं
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजस्थान के चर्चित एक्सपीओ निवेश घोटाले के पीड़ितों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। पीड़ितों ने सरकार और जांच एजेंसियों से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियां जब्त कर निवेशकों की मूल राशि लौटाने की मांग की। इससे पहले भी पीड़ित जोधपुर में धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। धरने में शामिल पीड़िता शीला तिवाड़ी ने बताया कि एक्सपीओ घोटाले में देशभर के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जोधपुर में धरना दिया गया था और अब झुंझुनूं में प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान पीड़ितों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया है। पीड़ितों का कहना है कि इस मामले में पांच प्रमुख प्रमोटरों में चार झुंझुनूं जिले के अलग—अलग इलाकों से है। विजय मौर्य, ईश्वर वर्मा, सुरेंद्र बरवड़ और सुरेंद्र सैनी झुंझुनूं जिले के है। वहीं रजत शर्मा जयपुर से है। सभी पर इनाम घोषित किया जा चुका है। उनका आरोप है कि ये सभी फिलहाल दुबई में छिपे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इन आरोपियों को दुबई से भारत लाकर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उनकी संपत्तियां बेचकर निवेशकों को उनकी मूल राशि वापस दिलाई जाए। धरने के दौरान झुंझुनूं के रईस अब्बासी, मयूर अब्बासी, वसीम अब्बासी और शाहरूख अब्बासी के फोटो भी लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करने और कंपनी से जोड़ने में करीब 125 स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही। जिनमें झुंझुनूं के ये चार लोग भी शामिल हैं। उनका दावा है कि ये सभी काफी समय से फरार हैं। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि जब भी निवेशकों द्वारा विरोध किया जाता है, तो कंपनी केवाईसी के नाम पर उन्हें आश्वासन देकर शांत करने का प्रयास करती है। हालांकि, उनका कहना है कि केवाईसी की प्रक्रिया कभी पूरी नहीं होती। अब तो कंपनी के एप पर निवेशकों की जमा राशि भी दिखाई देना बंद हो गई है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। धरने में यह भी दावा किया गया कि घोटाले से जुड़े लोगों ने एक दूसरी कंपनी बनाकर उसी तरह लोगों से निवेश कराने और ठगी का नया सिलसिला शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने इसकी भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पुलिस उनकी शिकायतों पर एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले से मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके 13 पीड़ित आत्महत्या कर चुके हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि एक्सपीओ निवेश घोटाला कुछ समय पहले सामने आया था। विभिन्न जांचों में इसकी रकम को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। शुरुआती जांच में करीब 3,100 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान लगाया गया था। जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में यह राशि 3,500 से 3,700 करोड़ रुपए तक बताई गई है। वहीं कुछ निवेशक संगठनों ने इससे भी अधिक राशि का दावा किया है। जिसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। पूरे देश के 20 राज्यों के साढ़े चार लाख लोग इस कंपनी में पैसा लगा चुके है। धरने के माध्यम से पीड़ितों ने सरकार से मांग की कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए, फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर भारत लाया जाए तथा उनकी संपत्तियां जब्त कर निवेशकों की मेहनत की कमाई वापस दिलाई जाए।













