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चुनाव सिर पर, मीडिया पास का संदेश ऐन वक्त पर! झुंझुनूं के जनसंपर्क कार्यालय की कार्यशैली कठघरे में!

8 अक्टूबर को मांगे दस्तावेज, 27 अक्टूबर को शाम 4:20 बजे पास लेने का संदेश , अगले दिन सुबह 7 बजे से मतदान—दूरदराज के पत्रकारों के सामने कवरेज की चुनौती
पीआरओ की कार्यशैली पर फिर उठे सवाल, पत्रकारों ने मांगी निष्पक्ष जांच , लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती की समीक्षा और नए पीआरओ की नियुक्ति की मांग

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को समय पर सूचना उपलब्ध कराने और प्रशासन तथा मीडिया के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाने वाला झुंझुनूं जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पंचायतीराज आम चुनाव -2026 के द्वितीय चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले मीडिया कर्मियों के प्राधिकार पत्र तैयार होने की सूचना प्रसारित किए जाने के मामले ने विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

8 अक्टूबर को दस्तावेज मांगे गए, 13 अक्टूबर अंतिम तिथि तय की गई और 27 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 20 मिनट पर पास बन जाने का संदेश प्रसारित हुआ। अगले दिन सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होना था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मीडिया पास जारी करने की प्रक्रिया इतनी देर से पूरी होने की स्थिति क्यों बनी और दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों को समय रहते सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

यह मामला महज एक संदेश देर से प्रसारित होने तक सीमित नहीं है। यह विभागीय समन्वय, समयबद्धता, मीडिया कर्मियों की व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनावी कवरेज के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़ा विषय है। यदि पत्रकारों से निर्धारित समय में आवेदन और दस्तावेज मांगे गए थे, तो प्राधिकार पत्रों की तैयारी और वितरण की समयसीमा भी स्पष्ट होनी चाहिए थी। अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन पूरे मामले का रिकॉर्ड खंगाले और यह तय करे कि देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।

दस्तावेज समय पर चाहिए, लेकिन पास की सूचना मतदान से चंद घंटे पहले क्यों?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय झुंझुनूं की अधिकृत ईमेल से प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जिला प्रभारियों को सूचना भेजी गई थी। इसमें आगामी पंचायतीराज चुनाव के लिए मीडिया कर्मियों के प्राधिकार पत्र जारी करने की प्रक्रिया के तहत संस्थान के लेटरहेड पर संवाददाता का नाम, पदनाम और संबंधित पंचायत समिति का नाम भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ हार्ड कॉपी में चार नवीनतम फोटो जमा कराने और पूरी जानकारी 13 अक्टूबर तक कार्यालय पहुंचाने को कहा गया था। सूचना में स्पष्ट किया गया था कि आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने पर प्राधिकार पत्र जारी नहीं हो पाएंगे। यह सूचना जनसंपर्क झुंझुनूं/पीआरओ जेजेएन के अधिकृत व्हाट्सएप ग्रुप में भी साझा की गई थी।

इसके बाद 27 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 20 मिनट पर इसी ग्रुप में संदेश प्रसारित किया गया कि मीडिया कर्मियों के पास बन चुके हैं और वे कार्यालय से प्राप्त कर लें। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आवेदन प्रक्रिया करीब दो सप्ताह पहले शुरू हो गई थी, तो प्राधिकार पत्र तैयार होने और उन्हें प्राप्त करने की सूचना मतदान से पहले पर्याप्त समय रहते क्यों नहीं दी गई? क्या आवेदन प्राप्त होने के बाद प्राधिकार पत्र तैयार करने की प्रक्रिया समय पर शुरू हुई थी? क्या सभी दस्तावेजों की जांच समय रहते पूरी कर ली गई थी? क्या संबंधित मीडिया संस्थानों को पास तैयार होने की जानकारी पहले से दी गई थी? यदि किसी कारण से देरी हुई, तो उसकी वजह क्या थी? इन सवालों का जवाब अनुमान से नहीं, बल्कि कार्यालय के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण से सामने आना चाहिए।

छह पंचायत समितियों में मतदान, लेकिन पत्रकारों के सामने समय का संकट

28 अक्टूबर को जिले की झुंझुनूं, चिड़ावा, सूरजगढ़, सिंघाना, पिलानी और बुहाना पंचायत समितियों के 102 वार्डों तथा जिला परिषद के 16 वार्डों में मतदान निर्धारित है। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है I ऐसे में मतदान से एक दिन पहले शाम 4:20 बजे पास तैयार होने की सूचना प्रसारित किए जाने से विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत संवाददाताओं के सामने व्यावहारिक कठिनाई पैदा हो सकती थी।

जिला मुख्यालय तक पहुंचने, कार्यालय से प्राधिकार पत्र प्राप्त करने और फिर संबंधित क्षेत्र में पहुंचकर चुनावी गतिविधियों की कवरेज करने के लिए समय और संसाधनों की जरूरत होती है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए यह चुनौती और बढ़ सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्राधिकार पत्र वितरण की व्यवस्था बनाते समय इन परिस्थितियों का ध्यान रखा गया था?

यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पास तैयार होने की सूचना मिलने और वास्तव में पास प्राप्त होने के बीच कितना अंतर रहा। क्या सभी पात्र पत्रकारों को समय पर प्राधिकार पत्र मिल गए थे? क्या किसी पत्रकार की कवरेज प्रभावित हुई? इन बिंदुओं की जांच से ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। प्रशासनिक प्रक्रिया तभी प्रभावी मानी जा सकती है, जब वह निर्धारित नियमों के साथ-साथ संबंधित लोगों की वास्तविक जरूरतों और समय की अनिवार्यता को भी ध्यान में रखे।

राज्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देशों के बीच विभागीय समन्वय पर सवाल

इसी चुनावी अवधि में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने झुंझुनूं में चुनाव संबंधी प्रशिक्षण के दौरान निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए। निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समन्वय का महत्व ऐसे अवसर पर और बढ़ जाता है। चुनाव के दौरान मीडिया की भूमिका मतदाताओं और आमजन तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने की होती है। हालांकि, पत्रकारों को भी निर्धारित नियमों और प्राधिकार पत्र संबंधी शर्तों का पालन करना आवश्यक है, लेकिन इन नियमों के क्रियान्वयन में समयबद्धता और स्पष्टता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।

ऐसे में मीडिया पास जारी करने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जिला प्रशासन को यह देखना चाहिए कि क्या कार्यालय की ओर से समय पर समन्वय किया गया था और क्या किसी स्तर पर अनावश्यक देरी हुई। यह सवाल किसी संवैधानिक संस्था या चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर मीडिया समन्वय की कार्यप्रणाली पर है।

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