Advertisement
Home राजस्थान झुंझुनूं सेल्फ स्टडी के दम पर नीतू डांगी ने रचा सफलता का इतिहास...

सेल्फ स्टडी के दम पर नीतू डांगी ने रचा सफलता का इतिहास , आरपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में हासिल की 9वीं रैंक

आरपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विषय में 9वीं रैंक हासिल करने वाली नीतू डांगी

एलआईसी में सहायक पद पर रहते हुए जारी रखी तैयारी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर बढ़ाया परिवार का गौरव

झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई इबारत लिखने वाली नीतू डांगी ने राजस्थान लोक सेवा आयोग ( आरपीएससी ) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विषय में 9वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन नीतू ने अपने दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।

नीतू डांगी वर्तमान में भारतीय जीवन बीमा निगम ( एलआईसी ) में सहायक के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी की व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया। नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास को अपनी तैयारी का आधार बनाते हुए उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान का सहारा लेने के बजाय सेल्फ स्टडी के माध्यम से यह उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उनकी उपलब्धि उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायी है, जो नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।

नीतू की इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन भी महत्वपूर्ण रहा। उनके ससुर उम्मेद सिंह कटेवा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जबकि सास प्रेम देवी हैं। वहीं, उनके पिता महेंद्र सिंह और माता सिलोचना देवी ने भी उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार से मिले संस्कारों, मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण ने नीतू को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।

आरपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में 9वीं रैंक हासिल करना नीतू डांगी की शैक्षणिक क्षमता, निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने साबित किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्पष्ट लक्ष्य, सही रणनीति और नियमित अध्ययन से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। उनकी सफलता न केवल परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

Advertisement