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डाइट चूरू में तीन दिवसीय परियोजना-आधारित अधिगम प्रशिक्षण का समापन, शिक्षकों को दिए नवाचारपूर्ण शिक्षण के गुर

डाइट चूरू में तीन दिवसीय परियोजना आधारित अधिगम पीबीएल शिक्षक प्रशिक्षण के समापन समारोह में शामिल प्रशिक्षक और शिक्षक

परियोजना-आधारित अधिगम से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने पर जोर

चूरू। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), चूरू के सीएमडीई प्रभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय परियोजना-आधारित अधिगम (प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग-पीबीएल) शिक्षक प्रशिक्षण का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डाइट के उपप्राचार्य नरेंद्र उपाध्याय रहे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को परियोजना-आधारित अधिगम की अवधारणा, प्रक्रिया और कक्षा-कक्ष में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गतिविधियों, खोज, प्रयोग और वास्तविक जीवन की समस्याओं के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सीएमडीई प्रभागाध्यक्ष कुसुम शेखावत के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण में परियोजना-आधारित अधिगम की आवश्यकता एवं महत्त्व, विद्यार्थियों में जिज्ञासा और खोज की प्रवृत्ति विकसित करने, गोल्ड स्टैंडर्ड पीबीएल फ्रेमवर्क तथा 4ब्े जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को ऐसी शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया गया, जिनके माध्यम से विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपनी समझ, रचनात्मक सोच और समस्या-समाधान की क्षमता को विकसित कर सकें। व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से समझी प्रशिक्षण की अवधारणा तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न मॉड्यूल का अध्ययन, समूह गतिविधियां, माइक्रो-टीचिंग, फीडबैक तथा प्रशिक्षण योजना को बेहतर बनाने से संबंधित व्यावहारिक अभ्यास करवाए गए।

इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को परियोजना-आधारित अधिगम की प्रक्रिया को समझने और उसे विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने के तरीकों की जानकारी दी गई। साथ ही शिक्षकों को विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने, उनके सवालों को प्रोत्साहित करने और सीखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के महत्त्व से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण में डाइट संकाय की ओर से आईएफआईसी प्रभागाध्यक्ष डॉ. विजय लक्ष्मी शेखावत एवं पी एंड एम प्रभागाध्यक्ष दिनेश कुमार की सहभागिता रही।

मुख्य संदर्भ व्यक्तियों के रूप में अजितपाल सिंह, हरिराम सारण, सुरेश डूडी एवं दशरथ नैन ने प्रशिक्षण सत्रों में अपनी भूमिका निभाई। सभी संदर्भ व्यक्तियों ने विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए परियोजना-आधारित अधिगम की अवधारणाओं को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर समझाया। एचपीसी के महत्त्व से कराया अवगत प्रशिक्षण के दौरान राज्य संदर्भ व्यक्ति सचिन धांडा ने एचपीसी (समग्र प्रगति पत्रक) की अवधारणा को समझाते हुए विद्यार्थियों की प्रगति के आकलन में इसके महत्त्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने समग्र विकास और सीखने की प्रक्रिया को समझने के लिए ऐसे आकलन की उपयोगिता पर चर्चा की। वहीं विजेंद्र सिंह ने सत्र संचालन में सहयोग किया, जबकि सुरेश बुंदेला तारा लक्ष्मी ने तकनीकी कार्यों में योगदान दिया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार, अनुभव और सुझाव साझा किए। प्रतिभागियों में रोहिताश ढाका, प्रदीप अत्रि सहित अन्य शिक्षकों ने प्रशिक्षण के विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजना-आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वयं सीखने, समूह में कार्य करने, सवाल पूछने, नए विचार प्रस्तुत करने और समस्याओं के समाधान खोजने के अवसर मिलते हैं। वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने विद्यालयों में इस शिक्षण पद्धति के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में विषयों की बेहतर समझ विकसित करने के साथ-साथ रचनात्मकता, सहयोग, संवाद और तार्किक चिंतन जैसे कौशलों को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन प्रतिभागियों द्वारा अर्जित अनुभवों, विचारों और व्यावहारिक गतिविधियों के आदान-प्रदान के साथ हुआ। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को अपने विद्यालयों में परियोजना-आधारित अधिगम को अपनाने तथा विद्यार्थियों के लिए अधिक रुचिकर, सहभागितापूर्ण और प्रभावी शिक्षण वातावरण तैयार करने की दिशा में प्रेरित किया गया।

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