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Home राजस्थान झुंझुनूं कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर में उर्वरक विक्रेताओं का 15 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर में उर्वरक विक्रेताओं का 15 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर आधारित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन

34 विक्रेता सीखेंगे उर्वरकों के संतुलित उपयोग के गुर , मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर किसानों को देंगे वैज्ञानिक सलाह

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
किसानों को फसलों की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने और खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, आबूसर में बुधवार से खुदरा उर्वरक विक्रेताओं का 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। 28 अक्टूबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में जिले के 34 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और कृषि आदानों की उपयोग दक्षता बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी।कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर आधारित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहन दादरवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दयानंद ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान खेती से जुड़ी समस्याओं और उर्वरकों के उपयोग की जानकारी के लिए सबसे पहले खुदरा विक्रेताओं से संपर्क करते हैं। ऐसे में विक्रेताओं को समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन की पूरी जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वे किसानों को फसलों की आवश्यकता के अनुसार सही उर्वरक उपलब्ध करवा सकें।

डॉ. दयानंद ने कहा कि वर्तमान समय में उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग रोकना और किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसके लिए विक्रेताओं को वैज्ञानिक जानकारी से सुसज्जित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि 15 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञ प्रतिभागियों को उर्वरकों के सही उपयोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे। उन्होंने कहा कि कृषि आदानों की उपयोग दक्षता बढ़ाना आज की प्रमुख आवश्यकता है।

इसके लिए उर्वरकों का सही मात्रा, सही अनुपात, सही समय और सही विधि से उपयोग करना जरूरी है। इससे खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहन दादरवाल ने प्रशिक्षणार्थियों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर फसलों में पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी भूमि और फसलों की आवश्यकता के अनुरूप कृषि आदान उपलब्ध करवाए जाने चाहिए।

इससे उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी और कृषि आदानों की उपयोग दक्षता में सुधार संभव है। डॉ. दादरवाल ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि वे प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों से अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें, ताकि उस ज्ञान का उपयोग जिले के किसानों को लाभान्वित करने में किया जा सके। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर किसानों को उचित मार्गदर्शन देने से कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, विक्रेता भी अपनी कार्यकुशलता और पहचान को मजबूत कर सकेंगे।

कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. रशीद खान ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित विभिन्न जानकारियां दीं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों के साथ अधिक से अधिक संवाद करने तथा कृषि से जुड़े विषयों पर गहन जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के कीट विशेषज्ञ राजेंद्र नागर ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केंद्र के देवी लाल, रमन मीणा एवं देवी सिंह सैनी सहित अन्य उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण का उद्देश्य खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को वैज्ञानिक जानकारी देकर किसानों तक सही मार्गदर्शन पहुंचाना है, ताकि उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिले, मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और खेती की लागत कम करके उत्पादन में वृद्धि की जा सके।

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