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सिंहोड़ को बबाई पंचायत समिति में शामिल करने का विरोध , सड़कों पर उतरने की चेतावनी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व राजीविका महिलाओं ने कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा—खेतड़ी से ही जुड़ा रहे सिंहोड़

खेतड़ी। झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
नवगठित पंचायत समिति बबाई में ग्राम पंचायत सिंहोड़ को शामिल किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में राजीविका महिला सदस्यों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर एवं उपखंड अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर सिंहोड़ ग्राम पंचायत को पंचायत समिति खेतड़ी में ही यथावत रखने की मांग की। साथ ही मांग नहीं माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी। ज्ञापन में बताया गया कि ग्राम पंचायत सिंहोड़ वर्तमान में पंचायत समिति खेतड़ी के अधीन आती है। अब नवगठित पंचायत समिति बबाई में सिंहोड़ को शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंहोड़ को बबाई पंचायत समिति में शामिल करने से क्षेत्र के लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, प्रमाण-पत्र बनवाने तथा पंचायत समिति स्तर के अन्य कार्यों के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि सिंहोड़ को बबाई पंचायत समिति में शामिल करने से राजकीय महिला कर्मचारियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी आवागमन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में खेतड़ी पंचायत समिति से जुड़े होने के कारण ग्रामीणों और कर्मचारियों के कार्य आसानी से हो रहे हैं। बबाई में शामिल किए जाने पर प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ आने-जाने में भी अतिरिक्त परेशानी बढ़ने की आशंका है । ग्रामीणों ने बताया कि सिंहोड़ ग्राम पंचायत की ओर से इस संबंध में बैठक आयोजित कर प्रस्ताव भी पारित किया गया है। प्रस्ताव में बबाई पंचायत समिति में शामिल किए जाने पर असहमति जताते हुए सिंहोड़ को पंचायत समिति खेतड़ी के अधीन ही यथावत रखने की बात कही गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देखते हुए सिंहोड़ का खेतड़ी पंचायत समिति में रहना ही उचित है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की कि नवसृजित पंचायत समिति बबाई में ग्राम पंचायत सिंहोड़ को शामिल नहीं किया जाए और उसे पंचायत समिति खेतड़ी के अधीन ही रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस दौरान निर्मला देवी, कविता, भावना, संजू, मंजू, मनेश, सुनीता, द्रोपदी, सुशीला, लाली देवी, लक्ष्मी, विद्या देवी, मोनिका, संतरा सहित अनेक ग्रामीण एवं महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

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