ब्लैकलिस्टिंग और एक लाख की पेनल्टी पर अंतरिम राहत, डीएलबी निदेशक, जिला कलक्टर व नगर परिषद आयुक्त से चार सप्ताह में मांगा जवाब
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजस्थान हाईकोर्ट ने झुंझुनूं शहर की अन्नपूर्णा रसोई संख्या-1520 का संचालन करने वाली संस्था शहरी आजीविका केंद्र संस्थान, झुंझुनूं को बड़ी राहत देते हुए स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत संस्था का अनुबंध निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया गया था तथा एक लाख रूपये की पेनल्टी लगाई गई थी। न्यायालय ने इस मामले में डीएलबी निदेशक, जिला कलक्टर झुंझुनूं एवं नगर परिषद आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। जानकारी के अनुसार रानी सती रोड स्थित अन्नपूर्णा रसोई संख्या-1520 का संचालन शहरी आजीविका केंद्र संस्थान द्वारा किया जा रहा था। स्वायत्त शासन विभाग एवं नगर परिषद की जांच के बाद कथित गंभीर अनियमितताओं का हवाला देते हुए 10 जून 2026 को संस्था का अनुबंध समाप्त कर उसे ब्लैकलिस्ट करने तथा एक लाख रूपये की पेनल्टी लगाने के आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों को चुनौती देते हुए संस्था के सचिव विमल यादव ने अपने अधिवक्ता संजय महला एवं सुनीता महला के माध्यम से राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि विभाग का आदेश मनमाना, जल्दबाजी में लिया गया तथा विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना पारित किया गया है। संस्था का पक्ष सुने बिना ही कार्रवाई कर दी गई, जबकि रसोई का संचालन नियमित रूप से किया जा रहा था और संस्था के खिलाफ किसी प्रकार की शिकायत या अनियमितता सिद्ध नहीं हुई थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं संजय महला एवं सुनीता महला ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना करते हुए संस्था को बिना सुनवाई का अवसर दिए दंडित किया गया है। उन्होंने न्यायालय से विवादित आदेश पर रोक लगाने तथा अन्नपूर्णा रसोई का संचालन पूर्ववत जारी रखने के निर्देश देने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति शुभा मेहता ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए 10 जून 2026 के विवादित आदेश के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही डीएलबी निदेशक, जिला कलक्टर एवं नगर परिषद आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।











