टाइगर हिल के वीरचक्र विजेता शहीद शीशराम गील को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की

27वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, शहीद के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प; विद्यार्थियों को जूते, बैग वितरित, किया वृक्षारोपण

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
कारगिल युद्ध के अमर योद्धा एवं वीरचक्र विजेता शहीद शीशराम गील की 27वीं पुण्यतिथि शनिवार को उनके पैतृक गांव बिशनपुरा में पूरे सम्मान, श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तथा उपस्थित लोगों ने उनके शौर्य, त्याग और बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद की वीरांगना संतरा देवी, पूर्व सैनिक एवं शहीद के पिता सरदारा राम, कुरड़ा राम धींवा (प्रदेश महासचिव, राजस्थान जाट महासभा), शहीद के भाई मातूराम, हवा सिंह, रामचंद्र, रामप्रताप, सेवानिवृत्त सूबेदार चंदगीराम कुलहरी, डॉ. सज्जन, डॉ. डिम्पल सहित अन्य अतिथियों ने शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण भी किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुरड़ा राम धींवा ने शहीद शीशराम गील के प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 16 जुलाई 1961 को झुंझुनूं जिले के बिशनपुरा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। बाद में उनके चाचा सरदारा राम एवं चाची सुरजी देवी ने उन्हें दत्तक पुत्र के रूप में अपनाया। 6 दिसंबर 1979 को वे भारतीय सेना की 8 जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए और वर्ष 1983 में उनका विवाह संतरा देवी के साथ हुआ। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान 9 जुलाई 1999 को ऑपरेशन विजय में 17 हजार फीट ऊंची टाइगर हिल पर कमांडो टीम का नेतृत्व करते हुए शहीद शीशराम गील ने दुश्मन की भीषण गोलाबारी के बीच अदम्य साहस का परिचय दिया। कठिन चढ़ाई के दौरान उन्होंने आठ पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनकी असाधारण वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें 26 जनवरी 2000 को मरणोपरांत ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया। शहीद के पिता सरदारा राम ने कहा कि शहीद राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होते हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक को ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ जीवन जीना चाहिए। वहीं सेवानिवृत्त सूबेदार चंदगीराम कुलहरी ने कहा कि शहीदों का स्थान देवताओं के समान है और किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत उनके स्मरण से होनी चाहिए। निकित गील ने कहा कि शहीद किसी जाति या धर्म विशेष के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। इसलिए शहीद परिवारों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। पुण्यतिथि के अवसर पर शहीद परिवार ने अपनी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वीरचक्र विजेता शहीद शीशराम गील राजकीय माध्यमिक विद्यालय के कक्षा पहली से बारहवीं तक के सभी विद्यार्थियों को जूते और जुराबें वितरित कीं। विद्यालय के उपप्रधानाचार्य ने कहा कि शहीद परिवार हर वर्ष विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के साथ शिक्षकों का सम्मान भी करता है, जिसके लिए विद्यालय परिवार सदैव उनका आभारी रहेगा। इस दौरान शहीद के भाई रामप्रताप गील एवं उनकी धर्मपत्नी ने विद्यार्थियों को स्कूल बैग भी वितरित किए, जिन्हें पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम में बताया गया कि शहीद के दोनों पुत्र भी राष्ट्रसेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं। बड़े पुत्र विजय सिंह गील सैनिक कल्याण बोर्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि छोटे पुत्र कैलाश गील भारतीय सेना में रहकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। दोनों भाई सामाजिक सेवा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं। इस अवसर पर सुमित कुलहरी, मनीराम जेजूसर, मंगतू सिंह शेखावत, पोकर गील, सुनील गील, विद्याधर कुलहरी, हरिसिंह गील, राजपाल गील, जयवीर धींवा, आशीष गील, मोनू गील, लक्की गील, सोनू गील, विजयपाल रेपस्वाल, अजय गील सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, विद्यार्थी और आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों ने शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर “शहीद शीशराम अमर रहें”, “जब तक सूरज-चांद रहेगा, शीशराम तेरा नाम रहेगा” तथा “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। अंत में शहीद के भाई हवा सिंह गील एवं रामप्रताप गील ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।