चार दिन से जल संकट झेल रहे ग्रामीण, शिकायतों के बाद भी नहीं जागा विभाग; क्षतिग्रस्त पाइपलाइन बनी परेशानी का सबब, आंदोलन की चेतावनी
खेतड़ी। झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
एक तरफ खेतड़ी क्षेत्र की ढाणियां बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही हैं, दूसरी तरफ डाडा फतेहपुरा में क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन से लाखों लीटर पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलदाय विभाग और पाइपलाइन रखरखाव एजेंसी की उदासीनता के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भारी रोष व्याप्त है। डाडा फतेहपुरा में खाखी जी मंदिर और बंजारा बस्ती के पास परियोजना की मुख्य पाइपलाइन में हुए लीकेज ने पूरे क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पाइपलाइन से लगातार पानी बह रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। परिणामस्वरूप कई ढाणियों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है और जहां सप्लाई पहुंच भी रही है, वहां पानी का दबाव बेहद कम है। ग्रामीण हरपाल सिंह ने बताया कि क्षेत्र में पहले से ही पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। इसके बावजूद पाइपलाइन लीकेज को समय रहते ठीक नहीं किया गया, जिससे लाखों लीटर पानी व्यर्थ बह चुका है। उन्होंने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
शिकायतों का अंबार, समाधान शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि चार दिनों से कई ढाणियों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। लोग पेयजल के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं, जबकि सड़क किनारे बह रहा पानी विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने से लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पाइपलाइन का रखरखाव करने वाली कंपनी भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल साबित हो रही है। यदि समय रहते लीकेज को ठीक कर दिया जाता तो न केवल पानी की बर्बादी रूक सकती थी, बल्कि प्रभावित ढाणियों को भी पर्याप्त पेयजल मिल सकता था। पाइपलाइन से लगातार हो रहे रिसाव के कारण सड़क पर पानी भर रहा है, जिससे आवागमन करने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सड़क को भी नुकसान पहुंच सकता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
अब आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र पाइपलाइन की मरम्मत कर जलापूर्ति व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो जलदाय विभाग कार्यालय के समक्ष विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। उनका कहना है कि भीषण गर्मी और जल संकट के समय पेयजल की इस प्रकार बर्बादी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
बड़ा सवाल : जब ढाणियों के लोग चार दिन से पानी के लिए तरस रहे हैं, तब सड़क पर बह रहे लाखों लीटर पानी को रोकने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा? और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की जवाबदेही किसकी है? खेतड़ी क्षेत्र में उभरता यह मामला अब केवल पाइपलाइन लीकेज का नहीं, बल्कि पेयजल प्रबंधन और जवाबदेही पर खड़े हो रहे गंभीर सवालों का विषय बनता जा रहा है।













