जयपुर के हृदय विशेषज्ञ ने रचा इतिहास: श्रीलंका में पहली बार सफल हुआ स्यूचरलेस एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण

कोलंबो के नेशनल हॉस्पिटल में हुई ऐतिहासिक सर्जरी, डॉ. अजीत बाना के नेतृत्व में मिला मरीज को अत्याधुनिक उपचार का लाभ

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में भारत और श्रीलंका के लिए एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि दर्ज करते हुए जयपुर के प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ एवं ईएचसीसी नेटवर्क के प्रेसिडेंट, कार्डियक साइंसेज चेयरमैन डॉ. अजीत बाना के नेतृत्व में श्रीलंका में पहली बार स्यूचरलेस एओर्टिक वाल्व (Perceval Plus) का सफल प्रत्यारोपण किया गया। यह ऐतिहासिक सर्जरी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित नेशनल हॉस्पिटल ऑफ श्रीलंका में संपन्न हुई। इस उपलब्धि को श्रीलंका की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके माध्यम से अब वहां के गंभीर हृदय रोगियों को विश्वस्तरीय और आधुनिक हृदय उपचार अपने ही देश में उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उन्हें विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार स्यूचरलेस एओर्टिक वाल्व तकनीक पारंपरिक वाल्व सर्जरी की तुलना में अधिक आधुनिक और प्रभावी है। इस प्रक्रिया में सर्जरी का समय कम लगता है, जिससे मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, कम जटिलताओं और बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों के लिए यह तकनीक अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। इस अवसर पर डॉ. अजीत बाना ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में नवाचार का वास्तविक उद्देश्य केवल नई तकनीकों को अपनाना नहीं, बल्कि मरीजों को अधिक सुरक्षित, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह सफलता टीमवर्क, समर्पण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में हृदय उपचार के नए आयाम स्थापित करेगी। इस जटिल और ऐतिहासिक प्रक्रिया को सफल बनाने में चिकित्सकों, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ तथा तकनीकी विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी के समन्वित प्रयासों से यह सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी। इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर लगातार कार्डियक साइंसेज के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों और वैश्विक विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है, ताकि मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार और बेहतर जीवन गुणवत्ता उपलब्ध कराई जा सके। “क्योंकि हर धड़कन मायने रखती है” — इसी संदेश के साथ यह उपलब्धि चिकित्सा जगत में एक नई प्रेरणा बनकर उभरी है।