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Home राजस्थान झुंझुनूं गौरीशंकर पांडे बने इंडियन आर्मी के धर्मगुरू

गौरीशंकर पांडे बने इंडियन आर्मी के धर्मगुरू

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धार्मिक परिवार की परंपरा को मिला नया सम्मान

झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
शेखावाटी की धरती ने एक बार फिर देश सेवा और संस्कारों की मिसाल पेश की है। झुंझुनूं के गौरीशंकर पांडे “बॉबी” का चयन इंडियन आर्मी में जूनियर कमिश्नर ऑफिसर ( जेसीओ ) पद पर धर्मगुरू के रूप में होने पर जिलेभर में खुशी और गौरव का माहौल है। यह उपलब्धि केवल पांडे परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान और प्रेरणा का विषय बन गई है। गौरीशंकर पांडे ऐसे परिवार से आते हैं, जहां धार्मिक संस्कार और सामाजिक सेवा की परंपरा वर्षों से रही है। उनके पिता स्वर्गीय महेश पांडे अपने समय में धार्मिक आयोजनों और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जाने जाते थे। अब पुत्र गौरीशंकर ने भारतीय सेना में धर्मगुरू बनकर परिवार की उस परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। विशेष बात यह भी है कि उनकी धर्मपत्नी रितम शर्मा धार्मिक और सांस्कृतिक जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। “नानी बाई को मायरो” की संगीतमयी कथाओं के माध्यम से वे प्रदेशभर में भक्ति और संस्कृति का संदेश देती रही हैं। ऐसे में यह परिवार अब धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा—तीनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। गौरीशंकर पांडे के चयन की खबर मिलते ही ब्राह्मण समाज सहित सर्व समाज के लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे झुंझुनूं जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। लोगों का कहना है कि सेना में धर्मगुरू का पद केवल नौकरी नहीं, बल्कि सैनिकों के मनोबल, संस्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा को मजबूत करने का महत्वपूर्ण दायित्व होता है। ऐसे में गौरीशंकर पांडे का चयन उनकी धार्मिक निष्ठा, संस्कार और समर्पण का प्रमाण है। झुंझुनूं की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शेखावाटी की मिट्टी में देशभक्ति और संस्कार दोनों समान रूप से रचे-बसे हैं।

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