जमाबंदी में नोट दर्ज कराने की गुहार, अवैध निर्माण रोकने की मांग; जिला वक्फ कमेटी ने तहसीलदार को लिखा पत्र
झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
शहर में वक्फ संपत्तियों पर कथित अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिला वक्फ कमेटी झुंझुनूं ने तहसीलदार को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद वक्फ भूमि पर रातों-रात कब्जे और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठा है।कार्यालय जिला वक्फ कमेटी झुंझुनूं की ओर से 7 मई 2026 को जारी पत्र में माननीय वक्फ न्यायाधिकरण के प्रकरण संख्या 60/2004 “दरगाह कमरूद्दीन शाह बनाम राजस्थान सरकार” के निर्णय का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि न्यायालय ने संबंधित भूमि को वक्फ संपत्ति मानते हुए वादी के कब्जे में हस्तक्षेप नहीं करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद कथित अतिक्रमणकारी सक्रिय हैं।पत्र के अनुसार संबंधित खसरा नंबर 543 रकबा 16 बीघा 4 बिस्वा तथा खसरा नंबर 536 रकबा 22 बीघा 9 बिस्वा भूमि को लेकर विवाद के बावजूद कथित रूप से चारदीवारी निर्माण और अन्य पक्के निर्माण किए जा रहे हैं। जिला वक्फ कमेटी ने इसे न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना बताते हुए जमाबंदी में न्यायालय निर्णय का नोट दर्ज कराने की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में भूमि से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि न्यायालय का आदेश मौजूद है तो फिर आखिर किसके संरक्षण में कथित अतिक्रमण जारी है? क्यों जिम्मेदार विभाग मौके पर कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं? क्या प्रशासन को किसी बड़े विवाद या टकराव का इंतजार है? पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित कब्जाधारी रात के अंधेरे में निर्माण कार्य कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सरकारी तंत्र की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे हो गई कि संवेदनशील भूमि पर खुलेआम गतिविधियां चलती रहीं और कार्रवाई कागजों तक सीमित रही। जिला वक्फ कमेटी ने तहसील प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के आदेश की पालना सुनिश्चित कराते हुए अवैध निर्माण तत्काल रुकवाया जाए तथा संबंधित रिकॉर्ड में आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज कर भविष्य में कब्जे के प्रयासों पर रोक लगाई जाए। पत्र की प्रति आयुक्त नगर परिषद झुंझुनूं को भी भेजी गई है।अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि न्यायालय के आदेशों के बावजूद हालात नहीं बदलते, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा प्रशासनिक और कानूनी विवाद बन सकता है।
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