3 आरोपियों की ट्रायल के दौरान मौत, सबूतों के अभाव में कोर्ट ने माना निर्दोष
झुंझुनूं I झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
झुंझुनूं जिले के बहुचर्चित गुढ़ागौड़जी थाना पथराव प्रकरण में करीब 7 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 39 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश (विशिष्ट न्यायाधीश, भारतीय विद्युत अधिनियम) ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया। इस मामले में पुलिस ने वर्ष 2018 में कुल 42 लोगों को नामजद किया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 3 आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष 39 आरोपियों पर मुकदमा चलता रहा। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 24 गवाह पेश किए गए, लेकिन आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। आरोपी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शीशराम सैनी ने पैरवी करते हुए अदालत में दलील दी कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव और द्वेष के चलते निर्दोष लोगों को मामले में फंसाया था। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत गवाह और साक्ष्य आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहे। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। ऐसे में साक्ष्यों के अभाव में किसी भी व्यक्ति को दंडित नहीं किया जा सकता, जिसके चलते सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
नाबालिग के अपहरण के बाद भड़का था मामला
गौरतलब है कि अगस्त 2018 में गुढ़ागौड़जी क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के अपहरण के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया था। पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए 14 अगस्त 2018 को ग्रामीणों ने थाने के सामने सड़क जाम कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया गया, तो भीड़ उग्र हो गई और थाने पर पथराव कर दिया। इस घटना में तत्कालीन थानाधिकारी अशोक चौधरी सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जबकि सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा था।घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी, जिस पर अब जाकर अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया I
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