स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप, अहमदाबाद के नेतृत्व में होगा प्रशिक्षण; नेतृत्व क्षमता, नवाचार और प्रबंधन कौशल को मिलेगा नया आयाम

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने झुंझुनूं डाइट सहित चार डाइट उदयपुर, नार्थ गोवा एवं गांधीनगर के प्रधानाचार्य का चयन लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम फॉर डाइट प्रिंसिपल्स के लिए चयन किया गया है। यह कार्यक्रम स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप (सॉल) अहमदाबाद द्वारा संचालित किया जाएगा। डाइट प्रधानाचार्य सुमित्रा झाझड़िया ने बताया कि इस लीडरशिप प्रोग्राम का उद्देश्य डाइट प्राचार्यों की नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल को 21वीं सदी की शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ करना है। इस कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में एक आवश्यकता विश्लेषण अभ्यास आयोजित किया जाएगा। ताकि प्रत्येक डाइट की चुनौतियों एवं प्राथमिकताओं को समझा जा सके। उसी के आधार पर नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन क्षमता संवर्धन कार्यक्रम को अनुकूलित किया जाएगा। प्रभागाध्यक्ष प्रमेंद्र कुल्हार ने बताया कि गत दिनों स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप (सॉल) अहमदाबाद के प्रोग्राम डायरेक्टर प्रणव पटेल एवं उनकी टीम ने डाइट झुंझुनूं की विजिट कर यहां के नवाचारों, कार्यों, गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने डाइट झुंझुनूं द्वारा किए जा रहे नवाचार, शोध कार्य एवं अन्य शैक्षिक और भौतिक उन्नयन कि सहराना की। कुल्हार ने बताया कि बदलते समय और परिवेश के अनुसार शैक्षिक क्षेत्र में तीव्र बदलाव हो रहे हैं। डिजिटल तकनीक, नई शिक्षण पद्धतियां और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन शिक्षा की परिभाषा बदल रहे हैं। डाइट्स को इन बदलावों के अनुरूप ढालने और शिक्षक, शिक्षार्थी एवं शिक्षा को अद्यतन करने के लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। इसलिए समय समय पर इस प्रकार के लीडरशिप प्रोग्राम आवश्यक हैं। एसएमडी प्रभागाध्यक्ष दीपेंद्र बुडानिया ने बताया कि लीडरशिप प्रोग्राम के लिए डाइट झुंझुनूं का चयन होना पूरे शैक्षिक परिवार के लिए हर्ष एवं गौरवान्वित करने वाला विषय है। साथ ही बुडानिया ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति—2020 ने डाइट्स की भूमिका को और व्यापक बना दिया है। अब डाइट्स केवल शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान न रहकर 21वीं सदी के कौशल और नवाचारों के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। इसके लिए संस्थागत दृष्टि, नवाचार की समझ और ठोस नेतृत्व की आवश्यकता है। इस प्रकार के लीडरशिप प्रोग्राम से डाइट प्राचार्यों में ठोस नेतृत्व क्षमता, संसाधनों का सही उपयोग, टीम प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना बनाने की योग्यता, नवाचार की समझ, स्थानीय चुनौतियों का समाधान खोजने और प्रयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की क्षमता विकसित होगी।














