शिक्षा संबलन जांच वापस लेने और प्री-प्राइमरी भुगतान बहाल करने की मांग, जिला कलक्टर को सौंपा ज्ञापन
हनुमानगढ़। हिमांशु मिढ्ढा
शिक्षा संबलन योजना के तहत निजी शिक्षण संस्थाओं की प्रस्तावित विशेष जांच के विरोध में जिलेभर के निजी विद्यालय संचालकों ने बुधवार को एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। जिले की लगभग 1050 निजी शिक्षण संस्थाओं ने अपने विद्यालय बंद रखकर जाट भवन से जिला कलेक्ट्रेट तक विशाल रोष मार्च निकाला। मार्च के दौरान निजी विद्यालय संचालकों ने अपने अधिकारों की रक्षा तथा निजी विद्यालयों के सहयोग से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। बाद में जिला कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षा संबलन योजना के अंतर्गत प्रस्तावित जांच को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की।
इसी के साथ धरना स्थल पर भाजपा प्रत्याशी अमित चौधरी पहुचे और शिक्षण संस्था संचालकों के मध्य आकर उनका ज्ञापन लिया और उनकी मांग को मजबूती से मुख्यमंत्री महादेय के समक्ष उठाने का आाश्वासन दिया। धरने के बाद सभी शिक्षण संस्था संचालक विधायक गणेशराज बंसल के निवास पर पहुचे और उन्हे उक्त मांगों के लिए ज्ञापन दिया।रोष मार्च में शामिल विद्यालय संचालकों का कहना था कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान द्वारा 3 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत राजएप के माध्यम से शिक्षा संबलन कार्यक्रम के अंतर्गत निजी शिक्षण संस्थाओं की विशेष जांच प्रस्तावित की गई है, जिसका एसआरएस प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा संबलन योजना मूल रूप से राजकीय विद्यालयों के उन्नयन के लिए संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण कर उनकी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएं और बजट निर्धारित किए जाते हैं, जबकि निजी विद्यालयों को सरकार की ओर से किसी प्रकार का अनुदान, योजना या बजट उपलब्ध नहीं कराया जाता। ऐसे में निजी शिक्षण संस्थाओं को इस योजना के अंतर्गत शामिल कर जांच करना न्यायसंगत नहीं है।ज्ञापन में कहा गया कि निजी शिक्षण संस्थाएं पूर्णतः स्वायत्तशासी हैं और निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी प्रबंधन समितियों द्वारा संचालित होती हैं। राज्य सरकार से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या अनुदान प्राप्त नहीं होने के बावजूद इस प्रकार की जांच थोपना उचित नहीं है।
इससे विद्यालयों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित होगा और संचालकों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा।विद्यालय संचालकों ने बताया कि राजस्थान में लगभग 33 हजार निजी शिक्षण संस्थाएं शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनमें से अधिकांश विद्यालय सीमित संसाधनों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरटीई के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष निजी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन किया जाता है तथा सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही भुगतान जारी किया जाता है। यदि इसके अतिरिक्त प्रतिमाह निरीक्षण की व्यवस्था लागू की जाती है तो विद्यालयों का पूरा ध्यान शिक्षा से हटकर केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह जाएगा।ज्ञापन में एक अन्य महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए कहा गया कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के आरटीई भुगतान को पूर्व की भांति नियमित रूप से जारी रखा जाए। संचालकों ने कहा कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से निजी विद्यालयों के संचालन पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी आदेश का पुनर्विचार कर उसे वापस लिया जाए, ताकि निजी शिक्षण संस्थाओं को राहत मिल सके और वे राज्य सरकार के साथ मिलकर शिक्षा के विकास में अपना योगदान निरंतर देते रहें।
इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा, प्राईवेट कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय, जिला अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा, जिला महासचिव भारत भूषण कौशिक, जिला महासचिव अशोक सुधार, संगठन मंत्री राजेश मिढ़ा, हनुमानगढ़ तहसील अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह, हनुमानगढ़ तहसील अध्यक्ष विजय सिंह चौहान, भादरा तहसील अध्यक्ष राजाराम कसवां, नोहर तहसील अध्यक्ष प्रदीप पुरोहित, टिब्बी तहसील अध्यक्ष नवनीत सिडाना, संगरिया तहसील अध्यक्ष हरचरण सिंह किगरा, पीलीबंगा तहसील अध्यक्ष भागीरथ सैन, रावतसर तहसील अध्यक्ष कैलाश सिंवर, गोलूवाला उपतहसील अध्यक्ष अनिल धारणिया तथा पल्लू उपतहसील अध्यक्ष ओम देग सहित जिलेभर के निजी विद्यालय संचालक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।अंत में एसोसिएशन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजी शिक्षण संस्थाएं शिक्षा व्यवस्था की मजबूत साझेदार हैं और सरकार को उन्हें सहयोगी मानते हुए उनकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना चाहिए।














