लेवल गायब, नालियां निगलीं, नियम ताक पर — विरोध के बाद रुका काम, पार्षद को उतरना पड़ा मैदान में
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शहर के छैलाराम नगर में वर्षों से जिस सीसी सड़क का इंतजार लोग उम्मीदों के साथ कर रहे थे, वही सड़क अब निर्माण शुरू होते ही विवादों और अनियमितताओं के घेरे में आ गई है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और समानता के सिद्धांतों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। हालात ऐसे बन गए कि लोगों को मंगलवार को मौके पर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा और काफी देर तक निर्माण कार्य बाधित रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब 20 फीट चौड़े रास्ते में महज 4 मीटर चौड़ी सीसी सड़क डाली जा रही है, वह भी बिना समुचित लेवल निकाले और बिना गुणवत्ता जांच के। लोगों ने सवाल उठाया कि जिस सामग्री से सड़क बनाई जा रही है, उसे देखकर ही उसकी मजबूती पर संदेह खड़ा हो रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सड़क कुछ महीनों में ही उखड़ने लगेगी। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा “पहचान” और “जान-पहचान” के आधार पर अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। आरोप है कि कुछ घरों के सामने नाली के लिए जगह छोड़े बिना सीधे रोड़ी डालकर सड़क बनाई जा रही थी, जबकि अन्य स्थानों पर अलग व्यवस्था अपनाई गई। इससे क्षेत्र में पक्षपात और मनमानी के आरोपों ने माहौल गरमा दिया। स्थानीय नागरिकों ने यह भी कहा कि सड़क निर्माण से पहले न तो सही ढंग से लेवल निकाला गया और न ही जल निकासी की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की गई। ऐसे में बरसात के दौरान कहीं पानी भराव और कहीं सड़क के नीचे खालीपन बनने की आशंका जताई जा रही है, जो भविष्य में सड़क टूटने का बड़ा कारण बन सकती है।विरोध बढ़ता देख मौके पर पहुंचे पार्षद प्रदीप कुमार सैनी ने लोगों और ठेकेदार के बीच बातचीत कराई। पार्षद ने स्पष्ट रूप से एक तरफ नाली की जगह छोड़े बिना दीवार तक सड़क बनाने का विरोध जताया और दोनों तरफ समान रूप से नाली के लिए जगह छोड़ने की बात कही। इसके बाद ठेकेदार ने दोनों तरफ नाली की जगह छोड़ने पर सहमति जताई, तब जाकर काफी देर बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सका। घटनास्थल पर पार्षद प्रदीप सैनी, श्रीराम सैनी, दलीप सैनी, शेर सिंह सैनी, अशोक सोनी, ओमप्रकाश सैनी, मनोहर सैनी, गजानंद सैनी, ओमप्रकाश शर्मा, संतोष सैनी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं तो जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक हैं। लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण सामग्री की जांच करवाई जाए और तकनीकी मानकों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से निर्माण कराया जाए, ताकि सरकारी धन और जनता की उम्मीदों दोनों के साथ खिलवाड़ न हो।
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